Posted on अगस्त 31st, 2005 द्वारा अनुनाद
बन्धुओं ! हम सबके सामूहिक प्रयत्न का परिणाम आपके सामने है । हमने एक हजार सुभाषितो का संकलन करने का लक्ष्य रखा था । शायद हम अभी वहाँ तक नहीं पहुँचे हैं लेकिन अगले एक सप्ताह के अन्दर उसको पा लेंगे । इसमें मुझे कोई शक नहीं है ।
समयाभाव के कारण मैं अभी तक […]
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Posted on अगस्त 24th, 2005 द्वारा अनुनाद
बन्धुओं , सुभाषितों की वर्षा के लिये मैं वैसे ही छटपटा रहा हूँ जैसे मालवा के किसान पानी के लिये ।
मालवा में बारिस का आँकडा चालीस इंच का है , उसका आधा कोटा तीन-चार दिन की बारिस मे पूरा हो गया । उसके बाद महीनों से सन्नाटा है । १२वी अनुगूँज का […]
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Posted on अगस्त 24th, 2005 द्वारा पंकज
लो कल लो बात। अब गूगल का गूगल टॉक भी आ गया है।
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Posted on अगस्त 21st, 2005 द्वारा अनुनाद
आधुनिक विषय
गणित
यथा शिखा मयूराणां , नागानां मणयो यथा ।
तद् वेदांगशास्त्राणां , गणितं मूर्ध्नि वर्तते ॥
– वेदांग ज्योतिष
( जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे उपर है, वैसे ही सभी वेदांग और शास्त्रों मे गणित का स्थान सबसे उपर है । )
बहुभिर्प्रलापैः किम् , त्रयलोके सचरारे ।
यद् किंचिद् वस्तु तत्सर्वम् , गणितेन् […]
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Posted on अगस्त 17th, 2005 द्वारा अनुनाद
सन्तों ! सुभाषितें प्रकाशित करते हुए एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि सुभाषितों को विषय के आधार पर वर्गीकृत करके प्रकाशित करें । इससे आपकी उस सुभाषित के बारे में सोच परिलक्षित होगी और संकलनकर्ता को बाद में सुविधा होगी, सो अलग । कभी-कभी एक ही सुभाषित कई विषयॊं के अन्तर्गत भी […]
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