Posted on दिसम्बर 31st, 2005 द्वारा rajneesh
दोस्तो, मैंने सतरहवीं अनुगूँज की मेज़बानी करने की तो सोच ली लेकिन मैं खुद इस विषय का माहिर बिलकुल नहीं हूं। ये तो ऐसे ही ‘कभी कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है’। तो इस बार की अनुगूँज का विषय है: क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए? क्या पुनर्मुल्याकंन करके एक नई मुद्रा बनानी चाहिए […]
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Posted on दिसम्बर 19th, 2005 द्वारा अनूप
सभी चिट्ठाकार साथियों को सूचित किया जाता है कि इंडीब्लागीस प्रतियोगिता में पर्चा दाखिल होना शुरू हो गया है। जो साथी इस प्रतियोगिता के लिये अपने चिट्ठे का नामांकन करवाना चाहते हैं वे करना शुरु कर दें। नामांकन २८ दिसम्बर तक दिये जा सकते हैं। लेकिन देर किस लिये करें ? शुभस्य शीघ्रम। नामांकन के […]
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Posted on दिसम्बर 17th, 2005 द्वारा ईस्वामी
“वाह!” और “बहुत खूब !” जैसे उद्गार अनायास अभिव्यक्त होते रहे! पूरे दो सप्ताह , प्रारंभ से अंत तक एक से बढ कर एक उम्दा लेखों और कविताओं का सिलसिला बना रहा. यहां तक की टिप्पणियों मे भी इस माहौल की अनुगूंज सुनाई पडी!
आशा थी की “(अति) आदर्शवादी संस्कार सही या गलत?” जैसा विषय […]
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Posted on दिसम्बर 16th, 2005 द्वारा देबाशीष
१५वीं अनुगूँज में पंकज ने विषय दिया था कि हम फिल्में क्यों देखते है? १५ प्रविष्टियाँ मिली अनूगूँज के एक वर्ष पूर्ण होने पर और घोषणानुसार हमें सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को पुरस्कृत करना है। तो बतायें कि कौन सी प्रविष्टि आप को सब से अच्छी लगी? मतदान करने की अंतिम तिथि है १६ 18 दिसंबर।
मतदान यहाँ […]
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Posted on दिसम्बर 9th, 2005 द्वारा पंकज
बचपन में माँ बाप कहते थे कि -
पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाबखेलोगे कूदोगे होवोगे खराब
पर लगता है यह कहावत गलत होती जा रही है। आप ने काफी समय वीडियो गेम्स खेलने पर बर्बाद किया होगा। मैंने तो बहुत किया है। डूम को लैब के प्रोजेक्टर पर लगा कर बहुत से शैतानो को नाश करने में […]
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