हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है!

सागर चँद नाहर जी के जबरिया सन्यास की घोषणा के कारण पर स्पष्टीकरण का प्रयास है यह लेख.
सुनील जी की बात खरा सोना है कि “किसी की टिप्पणी को दोष देना तो यह कहने जैसा हुआ कि लोग आप की बात को पढ़ कर अपने विचार इमानदारी से न लिखें, बल्कि झूठ मूठ के लिए”। […]

तेरे मैनर्स मेरे मैनर्स से सफ़ेद कैसे!

(हिंदी चिट्ठामंडल में रीडर्स डाइजेस्ट के हालिया सर्वे से शुरू हुई एक बहस चल रही है, जो इस मुद्दे से कहीं आगे तक जाती है। मैं फिलहाल बस इस सर्वे के बारे में दो-चार बातें कहना चाहता था, जो टिप्पणियों के लिए बड़ी नज़र आती हैं। इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ।)
मैनर्स या आचरण हमेशा देश-काल […]

हमारे विनय देसीपंडित पर

देसीपंडित भारतीय ब्लॉग्स की बेहतरीन प्रविष्टियों के बारे में जानकारी देने वाला लोकप्रिय जालस्थल है। कुछ समय पहले देसीपंडित ने भारतीय भाषाओं के चिट्ठों पर भी गौर करना शुरु किया, तब मैं और अनूप उससे जुड़े पर समयाभाव के कारण दोनों ही इसके लिये सतत समय नहीं दे पाये। हाल ही में मुझे देसीपंडित द्वारा […]

अनुगूँज: आदमी सौ के ऊपर और पोस्‍ट चार

हम पढ़ते आ रहे थे बहुत दिनों से हिंदी ब्‍लोगरों की संख्‍या १०० के ऊपर पहुँच गई है, लोगों को तालियां बजाते देखा भी, सुना भी। लेकिन अनुगूँज की प्रविष्‍टियाँ देखें तो नही लगता कि आदमी सौ के ऊपर। पहले ये संख्‍या कम होती थी लेकिन अनुपातिक प्रविष्‍टियाँ अच्‍छी खासी। तो भाई लोगों किस बात […]