Posted on जून 30th, 2006 द्वारा अतुल
सागर चँद नाहर जी के जबरिया सन्यास की घोषणा के कारण पर स्पष्टीकरण का प्रयास है यह लेख.
सुनील जी की बात खरा सोना है कि “किसी की टिप्पणी को दोष देना तो यह कहने जैसा हुआ कि लोग आप की बात को पढ़ कर अपने विचार इमानदारी से न लिखें, बल्कि झूठ मूठ के लिए”। […]
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Posted on जून 25th, 2006 द्वारा विनय
(हिंदी चिट्ठामंडल में रीडर्स डाइजेस्ट के हालिया सर्वे से शुरू हुई एक बहस चल रही है, जो इस मुद्दे से कहीं आगे तक जाती है। मैं फिलहाल बस इस सर्वे के बारे में दो-चार बातें कहना चाहता था, जो टिप्पणियों के लिए बड़ी नज़र आती हैं। इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ।)
मैनर्स या आचरण हमेशा देश-काल […]
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Posted on जून 12th, 2006 द्वारा देबाशीष
देसीपंडित भारतीय ब्लॉग्स की बेहतरीन प्रविष्टियों के बारे में जानकारी देने वाला लोकप्रिय जालस्थल है। कुछ समय पहले देसीपंडित ने भारतीय भाषाओं के चिट्ठों पर भी गौर करना शुरु किया, तब मैं और अनूप उससे जुड़े पर समयाभाव के कारण दोनों ही इसके लिये सतत समय नहीं दे पाये। हाल ही में मुझे देसीपंडित द्वारा […]
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Posted on जून 10th, 2006 द्वारा tarun
हम पढ़ते आ रहे थे बहुत दिनों से हिंदी ब्लोगरों की संख्या १०० के ऊपर पहुँच गई है, लोगों को तालियां बजाते देखा भी, सुना भी। लेकिन अनुगूँज की प्रविष्टियाँ देखें तो नही लगता कि आदमी सौ के ऊपर। पहले ये संख्या कम होती थी लेकिन अनुपातिक प्रविष्टियाँ अच्छी खासी। तो भाई लोगों किस बात […]
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