Posted on जुलाई 24th, 2006 द्वारा जीतेन्द्र
साथियों मुझे बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि श्री रामचरित मानस को सम्पूर्ण रूपेण यूनिकोड मे इन्टरनैट पर उपलब्ध करा दिया गया है। इस संकलन मे मुझे भाई रवि रतलामी और अनूप शुक्ला का बहुत बहुत सहयोग प्राप्त हुआ। इनके भागीरथी प्रयासों की ही वजह से आज यह संकलन पूर्ण रूप मे आपके […]
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Posted on जुलाई 23rd, 2006 द्वारा पंकज
आज जीमेल में गलती से माउस अतुल के नाम पर ही रह गया। कुछ क्षणों में जो देखा विश्वास नहीं हुआ, आप भी देखें
जो बात हम सभी को पता थी, जीमेल वालों को पता कैसे चली।
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Posted on जुलाई 20th, 2006 द्वारा रवि
ठहाकों की गूंज आपने सुनी या नहीं?
ठीक है, तमाम व्यस्तताओं के कारण ठहाकों की गूंज आप खुद नहीं गुंजा सके, परंतु आप अपने साथी चिट्ठाकारों द्वारा लगाए गए ठहाकों की जोरदार गूंजों को सुन-पढ़ तो सकते ही हैं. यदि आपने अभी तक हमारे साथ मिल कर ठहाके नहीं लगाए हैं, तो 21 वीं अनुगूंज के […]
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Posted on जुलाई 18th, 2006 द्वारा अनूप
जैसी कि खबर मिली है कि कुछ साथियों को अपने ब्लाग पोस्ट करने में असुविधा हो रही है। कारण जो भी हो लेकिन फिलहाल अड़चन है।
आलोक ने कुछ वैकल्पिक सुझाव बताये हैं। जीतू ने भी बताया है।
ये दोनों तकनीकी महारथी हैं। मैं अपने जैसे तकनीकी रूप से सामान्य साथियों को सुझाव देता हूँ कि अपना […]
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Posted on जुलाई 15th, 2006 द्वारा रवि
लॉ.: क्या बात है अनुगूंज डार्लिंग आज तुमने बहुत देर कर दी.
अ.: बॉस, क्या करूं तमाम चिट्ठों के चक्कर लगा रही थी कि स्मगल किए, चुराए हुए, नकल मारे कुछ चुटकुले चिट्ठाकारों ने लिखे हैं भी या नहीं.
लॉ.: तो क्या खबर है.
अ.: क्या बताऊं बॉस, मुझे तो शर्म आ रही है. खबर बहुत बुरी है.
लॉ.: हम भी तो […]
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