Posted on सितम्बर 17th, 2007 द्वारा देबाशीष
सितंबर 2005 में शशि सिंह ने “कारे कजरारे” नाम की विज्ञान फंतासी कथा “बुनो कहानी” पर शुरु की थी, एक वैज्ञानिक पिता की सांवली बेटी की दास्तां। कहानी पसंद तो की गई पर इसके बाद इसे पूरा करने का बीड़ा किसी ने नहीं उठाया। अब दो साल देर से ही सही इस कहानी को अंततः […]
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Posted on सितम्बर 15th, 2007 द्वारा देबाशीष
विस्तृत समाचार के लिये विष्णु बैरागी का चिट्ठा देखें।
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Posted on सितम्बर 2nd, 2007 द्वारा पंकज
फैक्टरियों के मालिक मशीनों की असली कीमत जानते हैं। इसीलिए बहुत सी फैक्टरियों में मशीनों को पूरी तरह चालू रखने के लिए शिफ्टों में काम होता है कि मशीनें हर समय चलती रहें। कम्पयूटर भी एक मशीन ही है (वैसे देबू, अमित व जीतू शायद इसे मशीन से अधिक मानें । समय के साथ […]
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