Fri 16 May, 2008
लेखक - जीशान जैदी
नोट - ड्रामा पढने के लिए
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टीवी पर चर्चा हो रही थी. एक लड़की का बलात्कार हो गया था. एक महोदय बोले लड़कियों को कम फैशन करना चाहिए... लेकिन क्यों..... कई प्रशन उठते हैं.. सबसे पहला की क्या कम फैशन करने से ऐसे अपराध नहीं होंगे ?इससे भी खतरनाक प्रशन यह है कि ऐसे अपराध …
आप अपने मोबाईल फोन से क्या करवाना चाहते हैं? कुछ ऐसा ही सवाल पूछा था मैसाचूसिट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के प्रोफेसर हाल एबेल्सन ने कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों से। इन छात्रों को असाइनमेंट के तौर पर प्रोफेसर हाल ने मोबाईल फोन के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने को कहा। इसके साथ …
काश! मैं बन जाऊँ एक सुगन्ध जो सबको महका दे सारी दुर्गन्ध उड़ा दे या बन जाऊँ एक गीत जिसे सब गुनगुनाएँ हर दिल को भा जाए अथवा… बन जाऊँ नीर सबकी प्यास बुझाऊँ सबको जीवन दे आऊँ या फिर.. बन जाऊँ एक आशा दूर कर दूँ निराशा हर …
कुछ बातें जो दुबेजी के बारे में मुझे इस वक्त याद आती है, वो मैं लिख रहा हूँ।त्रुटियों की माफी। मैं दुबेजी के साथ 1998 जुड़ा हूँ, एक बार हम लोग पूना गए थे 'इंशा अल्लाह' का शो करने वहाँ पर मुझॆ एक किताब मिली थी, धर्मवीर भारती की …
प्रिय तस्लीमा, अपने देश को छोड़ने का निर्णय तुमने किन परिस्थितियों में लिया होगा, इस दर्द को मैं समझ सकता हूं। इस देश को तुमने हमेशा देश से कहीं ऊपर एक 'परिवार' समझा है। जहां तुम हर बार आती थीं, रहती थीं, कुछ अपनी सुनाती, कुछ हमारी सुनती थीं। बावजूद …
चिन्हार एहेन नहिं की अहीं टा हमरा सँ चिन्हार नहिं, हमर अपन जिनगी सेहो हमरा सँ चिन्हार नहिं, अन्हार सँ पुछि लेब हमर घर'क पता, एहि शहर'क रोशनी हमरा सँ एखन चिन्हार नहिं, खोखरि लेब कोनो दिन ओकर चेहरा सँ नकाब, इ बनावटी सादगी हमरा सँ एखन चिन्हार नहिं, …
हिंदी के वयोवृद्ध लेखक एवं पत्रकार सुशील कुमार का शुक्रवार को दिल का दौरा पडने से निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। 1935 में इलाहाबाद में जन्मे कुमार हिंदी रीडर्स डाइजेस्ट पत्रिका सर्वोत्तम के संपादक थे। उन्होंने महाभारत के स्त्री पात्रों कुंती, पांचाली, गंधारी, देवकी, सत्यवती, रुक्मिणी पर …
थप्पड मामले में हरभजन सिंह को मिली सजा उनके लिये सबक हैं.सबसे पहले तो आई.पी.एल.लीग के दस मैचों में नहीं खेलने का प्रतिबंध लगा, इससे जो आर्थिक नुकसान हुआ, उसके बारे में यह कहा गया कि उनके द्वारा श्रीसंथ को मारा गया तमाचा तीन करोड रुपये का नुकसान दे गया,बदनामी …
हम जीते हैं क्यूं रोज़ ज़िंदगी क्यूं न ऐसा हो कि जब हम भर जाएं तो कुछ दिनों के लिए हम मर जाएं चंद रोज़ मर कर जब चाहें वापस ज़िंदा होकर आएं कुछ दिन पहले इंटरनेट को खंगालते हुए जब क्रायोनिक्स के बारे में पढ़ा तो अपने एक अजीज़ …
'तमिल टाइम्स' में दो दिन पहले एक विज्ञापन छपा था। नहीं-नहीं मुझे तमिल पढ़ना नहीं आता, वह तो बगल में बैठे मेरे मित्र और तमिल के युवा कवि मदिअलगन सुब्बैयाह यह अखबार पढ़ते-पढ़ते अचानक जोर-जोर से हंसने लगे। मैंने पूछा कि अभी तक तो सकुशल थे अचानक यह क्या हो …
अब तो ये भी याद नहीं... उसके
चेहरे पर आखिरी बार
मुस्कुराहट कब देखी थी आज
यूँ ही पुराने वक्त की,
तस्वीरों को पलट कर
तारीख़ों को जमा किया है
शायद कही से कोई दबी सी
मुस्कान उसके चेहरे पर
लौट आए!!! और पढ़ें...7 views. 1.0 rating
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अमेरिकी सरकार ने ध्रुवीय भालू को खतरे में पड़ी प्रजातियों की सूची में डाला है और चेतावनी दी है कि उत्तर धु्रव [आर्कटिक] महासागर में बर्फ पिघलने के कारण वहां उनका आवास खतरे में है। बर्फ पिघलने के रिकार्ड किए गए अभी तक के निम्नतम स्तर से जुड़ीं तस्वीरें …
अमेरिका में हिंदी बन रही है वैकल्पिक भाषा वाशिंगटन। अमेरिका में बड़ी संख्या में रह रहे गैर अंग्रेजी भाषी प्रवासी समुदायों में संपर्क भाषा के रूप में हिंदी उर्दू की स्वीकार्यता से चकित अमेरिकी समाज भी इसे अपनाने को तैयार हो रहा है। दुनिया भर से विभिन्न भाषा भाषी समुदायों …
देवमणि पाण्डेय पलकों पलकों हर चेहरे पर ठहरा रहता जाने कौन दिल में प्यार का दरिया बनकर बहता रहता जाने कौन दुनिया है इक भूल भुलैया लोग यहां खो जाते हैं हर पल मेरा हाथ पकड़कर चलता रहता जाने कौन कोई अब तक देख न पाया न कोई ये जान …
एक नए शोध के अनुसार अफ्रीका का सहारा क्षेत्र लगातार हरियाली घटते जाने की वजह से करीब 2700 साल पहले विश्व के सबसे बड़े मरुस्थल में तब्दील हो गया। हालाँकि पहले की खोज में कहा जाता रहा है कि जलवायु में अचानक परिवर्तन होने से ऐसा हुआ था। उत्तरी अफ्रीका …
आज फिर हमें इसी गीत की
ज़रूरत है! और खासतौर से
ज़रूरत है राज ठाकरे जैसे
लोगों को जिन्हें एकता का
मतलब और फयेदा नही पता।
ये गीत हम सब के दिलो दिमाग
में बचपन से बसा हुआ है।
प्यारे बोल और आवाज़।
मेरी ज़ुबान सूखी है जैसे मेरी आँखें लड़की हँस पड़ती है एक गीली हँसी उस नमी में उगता है कोई दिन एक जंगल रात उसके चेहरे में कभी कभी दो फूल शायद सफेद लिली ? लैबरनम के फूल उस अकेली सड़क को छूते हैं मैं छूती हूँ नमी लड़की छूती …
अगर आज के युग मे हनुमान जी होते तो हवा मे कुछ ऐसे हंगामे होते: नोट: पाठकों के लिए कुछ मजेदार खेल, इस कार्टून को देखकर आपके मन मे कुछ विचार आते है? या इस कार्टून का कोई शीर्षक नजर आता है? या कोई मजेदार संवाद याद आता हो तो …
भोपाल जयपुर के हादसे आज भी शहर के प्रमुख समाचारों के फ्रंट पेज पर असर रहा है । द पयोनीर ने लिखा है केन्द्र आरोप शिफ्ट करने में लगा है इस बात के साथ उन्होंने वसुन्धरा राजे का प्रेस कांफ्रेंस का फोटो भी लगाया है । अंदर के एक पेज …
गंगा के सतत प्रवाह के लिये प्रयत्नशील कई आंदोलनकारियों में से एक हैं प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल। प्रोफ़ेसर अग्रवाल की उम्र लगभग 80 वर्ष है, वे लगभग 20 वर्ष से चित्रकूट में रह रहे हैं। उन्होंने काफ़ी वर्षों तक आईआईटी कानपुर में पर्यावरण इंजीनियरिंग विषय को ... और पढ़ें...3 views. 1.0 …
जाने कैसे सपनों में खो गयी अखियाँ, मैं तो हूँ जागी मेरी सो गयी अखियाँ अजब दिवानी भयी, मोसे अनजानी भयी,पल में परायी देखो हो गयी अखियाँ।। बरसी ये कैसी धारा , काँपे तन मन सारा । रंग से अंग भिगो गयी अखियाँ ॥ मन उजियारा छाया , जग उजियारा …
जैसा कि आप सभी को पता है कि अभी पिछले दिनो मदर्स डे मनाया गया। अब इस मदर्स डे की वजह से माताओं को कितनी परेशानियां उठानी पड़ती है, वो इस कार्टून को देखकर आप स्वयं ही अंदाजा लगाइए: इस शानदार कार्टून को बनाया है अमरीका मे रहने वाले हमारे …
यह लगातार दूसरी बार है कि हम हिन्द-युग्म की यूनकवि प्रतियोगिता से वाराणसी निवासी देवेन्द्र कुमार पाण्डेय की कविता प्रकाशित कर रहे हैं। इनकी पहली ईनामी कविता \'मुट्टी भर धूप\' को पाठकों ने काफी पसंद किया था। पिछली बार किन्हीं कारणों से ये अपना चित्र नहीं भेज पाये थे, इस …
तेरी बेबाक आंखें सवाल बहुत करती हैं किसी सम्त शर्माती, थोड़ा झुकतीं तो हालात बदल सकती हैं। बेबाक आंखों में छिपे सवाल गोकि तुम्हारी कशमकश कभी 'तुम कौन' कभी सिर्फ मेरा ही ख्याल भरोसे में ये कमी बहुत खलती है तेरी बेबाक आंखें सवाल बहुत करती हैं। इक भरोसा …
बालीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित का जन्मदिन आज भोपाल में धूम धाम से मनाया गया। इस समारोह में माधुरी भले ही नहीं थीं मगर उनके पोस्टरों के सामने केक काट कर और मोमबत्तियां जलाकर उनके प्रशंसकों ने उनकी लंबी उम्र की कामना की।माधुरी दीक्षित भले ही 41 साल की उम्र …
देश-विदेश में एक्टिंग स्कूल खोलने के बाद कलाकार व फिल्म निर्माता अनुपम खेर अब पर्सनालिटी डेवलपमेंट स्कूल खोलने पर विचार कर रहे हैं। देश-विदेश में अनुपम ऐसे विद्यालय खोलने की योजना बना रहे हैं जहां हर उम्र के लोग आकर खुद को पहचान सकें।अनुपम ने बताया, "यह बदलाव कलाकारों के …
जहाँ भी मनाई हों लड़कियों के जाने की लड़को के जाने पर बंदिश लगा दो वहाँ फिर ना होगा कोई रेड लाइट एरिया ना होगी कोई कॉल गर्ल ना होगा रेप ना होगी कोई नाजायज़ औलाद होगा एक साफ सुथरा समाज जहाँ बराबर होगे हमारे नियम हमारे पुत्र , पुत्री …
महंगाई के दौर में एक और
फुटपाथ पे मिलने वाला
सस्ता शेर
जिन्हे समझा था सस्ता थे
शेर बड़े वो महँगे...
जिनसे अंखिया लड़ाई थी
हमने यार निकले वो भेंगे
कहते है कि आप भले तो जग भला, राजस्थान हमेशा से ही लोगों के आंसू पोछने में आगे रहा है उसी का नतिजा है कि अब यहाँ पर भी सेवा के हाथ बताने वालों की कमी नहीं है । आज कही पढने को मिला जहाँ एक तरफ़ हमारे हाथ तो …
'इन्वेस्ट इन बवेरिया' (Invest in Bavaria, www.invest-in-bavaria.de) बायरन वित्त मंत्रालय की एक परियोजना है जिसके तहत बायरन सरकार विश्व भर के निवेशकों को बायरन प्रांत में निवेश करने के लिये आकर्षित करना चाहती है। ये परियोजना करीब सात साल से चल रही है और इन वर्षों में अमरीका और जापान …
सब अपनों के बीच भी
कमी महसूस होती है
कुछ अपनों की
प्रश्न — कोलकाता से श्री मनीष कुमार पूछते हैं कि यदि ज्योतिष विज्ञान है तो सभी ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों में विविधता क्यों होती है ? उत्तर — हम सभी जानते हैं कि कोई भी शास्त्र या विज्ञान क्यों न हो , कार्य और कारण में सही संबंध स्थापित किया …
‘‘देखता हूँ, तुम भी कैसे
खेलते हो....?’’ और पढ़ें...2 views.
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सब कुछ है !! ( कव्वाली ) . सब कुछ है बक्षा खुदा ने! सब कुछ है बक्षा खुदा ने... हाय... सब कुछ है बक्षा खुदा ने, कहा कोई कमी है? चांदनी रात मे! चांदनी रात मे.. हाय... चांदनी रात मे, इक चांद नही है!! नही है!! नही है!! इक …
मैं नई कमीज पहन तुम्हें खत लिख रहा हूं किस तरह महसूस कर रही है वह मेरे शरीर से बातें करती अभी थोडी देर पहले पसीने से मिली थी अभी थोडी देर बाद धूल को मिलेगी कैसा लगेगा उसे साबुन से मिलना मेरी पत्नी के हाथों धोए जाना नई कमीज …
हरदोई, 15 मई (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के एक गांव के 18 युवकों और बच्चों को रोजगार दिलाने के नाम पर हैदराबाद में बेचने का मामला सामने आया है। बेचे गए बच्चों में से सात बच्चों के भागकर वापस गांव आने और बंधकों द्वारा फोन पर दी गई …
अनुराग अन्वेषी सुरेश जी का \'दहल\' जाना पढ़ा और दूसरों को 'दहलाने की उनकी कोशिश' भी देखी। सुरेश जी कितने संवेदनशील हैं इस बात का पता इससे ही चल जाता है कि उन्होंने इतनी भयंकर वारदात को महज 'घटना' माना है। उन्होंने लिखा है 'यह नारी अशिक्षित नहीं है. उसने …
आज का मीडिया जगत
आज मीडिया का यही हाल चाल
है
कहीं है नाग नागिन का डांस
तो भूत प्रेतों का जंजाल
है
कभी है रखी का पप्पी काण्ड
तो कहीं खली से पठनी खाता
पत्रकार है
लगता है भईया यही है मीडिया
जिन्होंने संजोये और पाले लाखों सपने आज उन भीगे आबशारों का कोई नही है जिसमें बसा करता था कभी एक घर आज उन टूटी दीवारों का कोई नहीं है जिनका साथ पा कर चढी ऊंची मिनारें आज उन कमजोर सहारों का कोई नहीं है जहां पर खेलती रौनकें थी जमाने …
म्हारा सहर की बिजली, वा जो,
सड़क ना पे लगी रे नी वा
सूर्य देवता का परकास से
जले है, ने जदे सूर्यास्त
हुई जावे तो वे भी बिचारी ना
बुझी जावे। - नवीन बी. जोशी
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कई होयगो इना देस को पुलिस कचरो करे केस को दफतर-दफतर बैठ्या दलाल, अफसरज खींचे है खाल, जुवान पढ़े रस्तो ले बिदेस को, कईं होयगा इना देस को, नेता कुरछी के है तोड़े, जम्या रेवे पद नी छोड़े, चलाय तमाशो करे केश को कईं होयगा इना देस को गाँधी नेहरू …
जिनगी का थपेड़ा मऽ हम तो भण्डई गया, सोच्यो कईं थो नऽ, हाल कईं हुई गया। खिल्यो-खिल्यो रूप थो, नऽ कसी थी जुवानी, आवं तो गुठली सी ज्यादा हम चुसई गया। दुःख-दरद मिलज सदा नऽ होवऽ नाक मऽ दम, घर-गरस्थी की चक्की मऽ हम तो पिसई गया। भगवान को नाव …
दिनों दिन जनप्रतिनिधियों का आचार और और व्यवहार मैं गिरावट आ रही है . कभी पैसे लेकर संसद मैं प्रश्न पूछना , कभी आय से अधिक धन संपत्ति का पाया जाना , तो कभी भ्रष्टाचार के मामले उजागर होना और मारपीट व हत्या जैसे संगीन आरोप लगना . संसद …
रिकी मुखोपाध्याय की एक बांग्ला कविता ( बांग्ला से अनुवाद : प्रियंकर ) भाषा-भूगोल का मानचित्र जो लोग अनुवाद कार्य से जुड़े हैं उन्हें पता है कि ‘रेनबो' का हिंदी समानार्थी है इन्द्रधनुष और बांग्ला में रामधनु …. पर किसी को नहीं पता कि बारिश के आखिरी दिनों …
भूक्यो नी जाणे
सूक्यो-पाक्यो तिस्यो नी
जाणे छाण्यो-वाण्यो उँघतो
नी जाणे घूडो-बाडो लालची नी
जाणे अपणो-परायो न्यायी नी
जाणे थारो-म्हारो कपूत नी
जाणे रिस्तो-विस्तो काळ नी
जाणे छोट्यो-मोट्यो
परमात्मा नी जाणे
रूप्यो-पयसो जाग नी जाणे
गिल्यो-सूक्यो चोर नी जाणे
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नवो टाटो मत छाबो। जगे-जगे बुरई का जाला छवाना ज्ञान का बुवारा से उने झाड़ी दो। बायर-बायर मत चमकाव थोड़ो अंदर बी झाँकी लो। मनक-मनक से दूर हुई रियो प्रेमभाव का जाला झटकी लो। सगली इन्दरी सुदी चाले इना वास्ते मन पे लगाम कसी लो। मेनत करवा मे पाछे मत …
ॐकार! जय जय कार! सरजनहार, तारणहार, पालनहार, ॐकार ॐकार! जय जयकार। दिल खऽ स्वागत मंच बणायो मंगल भाव सी ओखऽ सजायो मन को मोर खुसी मऽ गावऽ अभिनंदन सौ बार ॐकार! जय जयकार। रेवा माँय! अज्ञान मिटइ दऽ हम सबको अभिमान हटई द ऽ खुलऽ ज्ञान को द्वार खुलऽ कला …
कविता टैग निहायत जरूरी है एक उम्दा लिबास बचने के लिए मौसम की मार से गरमी-सरदी से, बरसात से धर्म भी कम जरूरी नहीं आदमी के लिए लिबास की तरह ही पर लिबास हो या धर्म जरूरी है देखना उपयोगिता भी उसकी उसे ढंग से पहनना धरण करना पर …
उसने मुझको छोड मेरे कतरे कतरे को चाहा था उसने कतरा कतरा ले कर मुझको छोड दिया जीने.. मैं कहता हूँ सागर से मुझमे डूब मरो कम्बख्त कलेजा भर जायेगा मेरी आँखों से तो सारा झर जायेगा उसने तो मन की गागर में ठूस ठूस कर सागर भर कर …

