Narad
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अक्षरग्राम नेटवर्क

Sun 12 October, 2008

sush12 द्वारा 07:59 am (IST) पर
चिट्ठा : Sush12's Weblog
आश्विन  शुक्ला  पूर्णिमा  को  ‘शरत पूर्णिमा'  कहते  हैं। इस  दिन  प्रातःकाल  आराध्यदेव  को सुन्दर  आभूषणों   से  सुशोभित  करके  पुजन  करना  चाहियें। रात्रि  के  समय  गाय  के  दूध  से  बनी खीर में  घी  और  सफ़ेद  खांड  मिलाकर अर्धरात्रि  के  समय  भगवान  के  अर्पण  करें। पूर्ण चंद्रमा  के  आकाश  के  मध्य  में 
युग-विमर्श द्वारा 07:55 am (IST) पर
गुरूर उसको न था हुस्न का, मगर कुछ था. कि वो हरेक की नज़रों से बाखबर कुछ था. ***** इन आँधियों में कोई ऐसी ख़ास बात न थी, गिला सा फिर भी गुलों की ज़बान पर कुछ था. ***** सुखन-शनास था, अच्छा-बुरा परखता था, मेरे कलाम का उसपर कहीं
नारदमुनि द्वारा 07:51 am (IST) पर
चिट्ठा : रंगकर्मी
----- चुटकी----- हे! प्रधानमंत्री जी अब तो सम्भाल लो, या फ़िर जो थोड़ा बहुत दम बचा है वो भी निकाल लो। ----गोविन्द गोयल ------ चुटकी----- ये जो महान देश हमारा है, वह आजकल अर्थशास्त्री का मारा है। ----गोविन्द गोयल -----चुटकी------ बस करार के लिए बेकरार है अपनी सरकार, उसके लिए
नारदमुनि द्वारा 07:41 am (IST) पर
चिट्ठा : भड़ास
--- चुटकी----- ये जो महान देश हमारा है, वह आजकल अर्थशास्त्री का मारा है। ---गोविन्द गोयल
संजीव तिवारी द्वारा 07:36 am (IST) पर
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा देखने में आ रहा है कि दहेज उत्पीड़न कानून का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। इसलिए कानून निर्माताओं को इस कानून पर विचार करने की जरूरत है। जस्टिस अरुणा सुरेश की पीठ ने दहेज हत्या व दहेज प्रताड़ना के आरोपी योगेश शर्मा
नारदमुनि द्वारा 07:34 am (IST) पर
चिट्ठा : भड़ास
-----चुटकी----- बस करार के लिए बेकरार है अपनी सरकार, उसके लिए भाड़ में जाए शेयर बाज़ार। -----गोविन्द गोयल
नारदमुनि द्वारा 07:27 am (IST) पर
चिट्ठा : भड़ास
----- चुटकी---- हे! प्रधानमंत्री जी अब तो सम्भाल लो, या फ़िर जो थोड़ा दम बचा है उसको भी निकल लो। ---गोविन्द गोयल [०९४१४२४६०८०]
anupam... kaafir द्वारा 07:25 am (IST) पर
चिट्ठा : kuch nagme..
है इंतज़ार हमें भी किसीका, हमको यूँ बैरागी न समझो, उन आँखों की तलाश हमें भी है, अभी तलाश ख़तम न समझो. सूना लगता है मुझे भी दायरा, और दायरा सिमटा न समझो, आसमान छुने की है ललक अभी बाकी, ज़िन्दगी की उड़ान ख़तम न समझो. साथी की कमी है
गुरतुर गोठ द्वारा 07:23 am (IST) पर
चिट्ठा : गुरतुर गोठ
सुरता के दियना, बारेच रहिबे, रस्ता जोहत तैं ढाढेंच रहिबे। रइही घपटे अंधियारी के रात, निरखत आहूं तभो तोर दुआरी। मैं बनके हिमगिरी,तैं पर्वत रानी, मौसम मंसूरी बिताबो जिनगानी। कुलकत करबो अतंस के हम बात, निरखत आहूं तभो तोर दुआरी। मैं करिया लोहा कसमुरचावत हावौं, तैं पारस आके तोर लंग
नारदमुनि द्वारा 07:20 am (IST) पर
चिट्ठा : भड़ास
भड़ास के संचालक मंडल को नमस्कार, भड़ास की ओर से श्रीमान रजनीश जी ने जो फतवा जारी किया वह एक तरफा है। इस में कोई दो राय नहीं की भड़ास आपका है और आपका ही रहेगा, हम जैसे तो मुसाफिर हैं,आते जाते रहेंगे। मगर जब कोई मंच सार्थक बहस के
विनय द्वारा 07:17 am (IST) पर
चिट्ठा : अपनी ढपली
जब शाम को विजय का फ़ोन आया तो नींद में था( अपनी बॉडी-क्लोक जरा हिली हुई है!) . "7 बजे. पंजाब नेशनल बैंक स्टाफ कॉलेज सभागार, अंडर हिल रोड. सोचा के शायद तुम आना पसंद करोगे. और घर पर खाना के लिए मना कर देना. बाद में डिनर भी है
नारदमुनि द्वारा 07:15 am (IST) पर
चिट्ठा : नारदमुनि जी
----- चुटकी----- ये जो महान देश हमारा है, वह अर्थशास्त्री का मारा है। -------गोविन्द गोयल
ANIL YADAV द्वारा 07:14 am (IST) पर
चिट्ठा : कबाड़खाना
अशोक पांन्डेः विन्सेन्ट वान गॉग को एब्सिन्थ पसन्द थी. और पॉल गोगां को भी. हल्के आसमानी रंग की यह दारू मैंने पहली बार प्राग के एक रेलवे स्टेशन पर ख़रीदी थी और अगले रोज़ प्राग में ही काफ़्का संग्रहालय जाने के पहले उस अतीव प्रभावकारी दारू के दो गिलास चढ़ा
GWALIOR TIMES द्वारा 07:11 am (IST) पर
दैनिक भास्‍कर ने भारी एण्‍टी इंकम्‍बेन्‍सी फैक्‍टर और जन मुद्दों की चेतावनी दी भास्‍कर ने अप्रत्‍यक्ष चेतावनी दी बदल रही हैं राज्‍यों में सरकार, परिवर्तन की आहट और सत्‍ता दल की देहरी पर संकट की दस्‍तक असलियत से दूर रहने का दण्‍ड भुगतेंगें सत्‍ता दल बेरोजगारी, भ्रष्‍टाचार, विकास और
नारदमुनि द्वारा 07:10 am (IST) पर
चिट्ठा : नारदमुनि जी
----- चुटकी----- हे! प्रधानमंत्री जी अब तो संभाल लो, या जो थोड़ा बहुत दम बचा है उसको भी निकाल लो। ----गोविन्द गोयल
नारदमुनि द्वारा 07:07 am (IST) पर
चिट्ठा : नारदमुनि जी
----- चुटकी----- बस करार के लिए बेकरार है अपनी सरकार, भाड़ में जाए शेयर बाज़ार। ----गोविन्द गोयल
GWALIOR TIMES द्वारा 06:56 am (IST) पर
पोषण-जीवन का सेहत भरा तरीका डॉ. संतोष जैन पासी पर्याप्त भोजन, कपड़े और आवास जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं हैं जिनमें से भोजन सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। भोजन न सिर्फ भूख को संतुष्ट करता है बल्कि विभिन्न गतिविधियों के लिए पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है और हमे स्वस्थ रखता है।
GWALIOR TIMES द्वारा 06:55 am (IST) पर
बेटे के प्यार व बुलन्द हौसले से मिली जीवन की राह -रामेश्वर लाल मीणा* मिटा दे खाक में खुद को अगर कुछ मर्तबा चाहे कि दाना खाक में मिलकर गुले गुलजार होता है। उदयपुर जिले की मावली पंचायत समिति के थामला गांव की निवासी मंजू जोशी को जिन्दगी ने
GWALIOR TIMES द्वारा 06:47 am (IST) पर
दुर्लभ और संकटापन्न औषधियों को संरक्षित रखता है-एनएमपीबी पीबी बी.एस.सजवान राष्ट्रीय औषधीय वनस्पति बोर्ड (एनएमपीबी) का नवम्बर, 2000 में आयुष विभाग के तौर पर गठन कर दिया गया। यह विभाग औषधीय वनस्पतियों की सुरक्षा और खेती के लिए की जाने वाली पहलों के लिए उत्तरदायी है। 9वीं और 10वीं
Dr Prabhat Tandon द्वारा 06:17 am (IST) पर
एक सफ़ल होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये यह आवशयक है कि वह पूर्वाग्रहों से मुक्त रहे और रोगी मे किसी भी विशिषट दवा के चयन से अपने को दूर रखे । यानि रोग के नाम के आधार पर अगर चिकित्सा की जा रही है तो असफ़लता निशिचित है । यह बात
योगेन्द्र मौदगिल द्वारा 06:10 am (IST) पर
नज़रों के साथ कर गये तक़रार की बातें. लफ्ज़ों के हेरफेर से तलवार की बातें. बगुलों से सबक सीख कर वो आये थे शायद, जो वार के संग कर गये सत्कार की बातें. जंगल से लेके शहर तक सरगोशियां सी थी, घर-घर में उठ रही थीं यों दीवार की बातें.
साहित्य-शिल्पी द्वारा 06:00 am (IST) पर
यह निबंध बीए के उस छात्र का है, जिसने आनलाइन चैटिंग विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार हासिल किया है 1-आनलाइन चैटिंग में सबसे बड़ा फायदा है कि बातचीत करने के लिए साफ-सुथऱा रहने और नहाने की जरुरत नहीं होती। जिस भी अवस्था में चाहे, बंदा बातचीत कर
Himanshu Pota द्वारा 05:22 am (IST) पर
चिट्ठा : Learn Sanskrit
बभूव बभूवतुः बभूवुः बभूविथ बभूवथुः बभूव बभूव बभूविव बभूविम सः बभूव। तौ बभूवतुः। ते बभूवुः। सा बभूव। ते बभूवतुः। ता बभूवुः। त्वं बभूविथ। युवां बभूवथुः। यूयं बभूव। अहं बभूव। आवां बभूविव। वयं बभूविम। २००८-१०-१२ रविवासरः (2008-10-12 Sunday)       
योगेन्द्र मौदगिल द्वारा 04:56 am (IST) पर
कभी एहसां ये हम पर मुरली वाले श्याम हो जाये कि कोई तान बंसी की हमारे नाम हो जाये यहीं कुछ देर रख देते हैं सामानेसफ़र अपना बड़ी सुन्दर जगह है दो घड़ी विश्राम हो जाये वो दिल जो पाक हो नफरत से वो दिल एक मंदिर है नमन हो
लोकेश द्वारा 04:47 am (IST) पर
चिट्ठा : अदालत
भारतीय क्रिकेट टीम के आफ स्पिनर हरभजन सिंह द्वारा एक टीवी चैनल के रियलिटी शो में रावण का वेश धारण कर सीता बनी टीवी कलाकार मोना सिंह के साथ डांस करने का मामला अब कोर्ट पहुंच गया है। भज्जी-मोना के इस नृत्य पर सिखों के साथ-साथ हिंदू संगठनों ने भी
alok द्वारा 04:17 am (IST) पर
जमीन का लोकतंत्र कारपोरेट के सपनों के आकाश को किस तरह से प्रभावित करता है, हाल में भारतीय कारपोरेट जगत ने इसके दो नमूने देखे। एक तो बहुचर्चित रहा। टाटा मोटर्स को सिंगूर में अपना प्लांट समेटना पड़ा और कहीं और की राह देखनी पड़ी। दूसरा मसला, अपेक्षाकृत कम चर्चित
Gyandutt Pandey द्वारा 04:15 am (IST) पर
चिट्ठा : मानसिक हलचल
------------------------- शिवकुमार मिश्र ने ग्रेटर फूल्स थियरी की बात की। मुझे इसके बारे में मालुम नहीं था। लिहाजा, ऐज अ फूल, अपनी अज्ञानता बिन छिपाये, शिव से ही पूछा लिया। ग्रेटर फूल थियरी, माने अपने से बेहतर मूर्ख जो आपके संदिग्ध निवेश को खरीद लेगा, के मिलने पर विश्वास
निशांत मिश्र द्वारा 03:50 am (IST) पर
एक बार दो यात्री मरुस्थल में खो गए। भूख और प्यास के मारे उनकी जान निकली जा रही थी। एक स्थान पर उनको एक ऊँची दीवार दिखी। दीवार के पीछे उन्हें पानी के बहने और चिडियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी। दीवार के ऊपर पेड़ों की डालियाँ झूल रही
Neeraj Singh द्वारा 03:46 am (IST) पर
चिट्ठा : पंचायतनामा
Image by google via Flickr राम राम पंचों. आज भगत जी फिर से गाँव में आए हैं. हमेशा की तरह लोगों की भीड़ उनको घेरे हुए है. अन्तिम बार आए थे तो उन्होंने पंचों को ईमानदारी का अनमोल सबक दिया था. ये दो लाइनें कल्लू को अभी तक याद हैं.
**Who Cares** द्वारा 03:44 am (IST) पर
पिछले कुछ दिनों में द्रोणा और किडनैप दोनों फिल्मो के बहुत advertisements देखे ... बड़ी आस थी की अच्छा मनोरंजन का इंतजाम हो रहा है । लेकिन दोनों ही फिल्मों ने बहुत निराश किया है , द्रोणा ने एक ओर इतना काल्पनिक रूप ले लिया की कल्पना के परे हो
निशांत मिश्र द्वारा 03:34 am (IST) पर
एक बौद्ध भिक्षुणी निर्वाण प्राप्ति के लिए साधनारत थी। उसने भगवान् बुद्ध की एक मूर्ति बनवाई और उसपर सोने का पत्तर लगवाया। उस मूर्ति को वह जहाँ भी जाती अपने साथ ले जाती थी। साल-दर-साल गुजरते गए। वह भिक्षुणी अपने भगवान् की मूर्ति लेकर एक ऐसे मठ में रहने आ
निशांत मिश्र द्वारा 03:19 am (IST) पर
एक ज़ेन गुरु ने देखा कि उसके पाँच शिष्य बाज़ार से अपनी-अपनी साइकिलों पर लौट रहे हैं। जब वे साइकिलों से उतर गए तब गुरु ने उनसे पूछा - "तुम सब साइकिलें क्यों चलाते हो?" पहले शिष्य ने उत्तर दिया - "मेरी साइकिल पर आलुओं का बोरा बंधा है। इससे
Satyajeetprakash द्वारा 03:09 am (IST) पर
चिट्ठा : हृदयांजलि
मैंने वो लेख एक प्रतिक्रिया में लिखी थी. मैं सर्वश्रेष्ठ रहकर भी किसी को अपने से नीचा नहीं देखना चाहता हूं. हिंदू धर्म सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन ना तो मुस्लिम ना तो ईसाई धर्म इससे कमतर है. हिंदू धर्म ने हमें यहीं श्रेष्ठता सिखलाई है. जहां तक मैं हिंदू धर्म को
naween द्वारा 02:37 am (IST) पर
चिट्ठा : who am i
कल तुमसे कहते कहते रुक गई थी कहीं जुबां कहना था जरूरी कुछ शब्दों के ना मिले निशान कहना था कि बस तुम जाना नहीं अब कहीं कि कभी आंसू छलकें तुम चली आना वहीँ कहना था कि जब तुम गुम हो जाती हो कहीं ज़िन्दगी बस रुकी-थमी रोती
निशांत मिश्र द्वारा 02:29 am (IST) पर
*किसी दूसरे दीये को जला देने पर पहले दीये की रौशनी कम नहीं हो जाती। *ऊँट वास्तव में घोड़ा बनाने वाली समिति ने डिजाईन किया था। *शांत समुद्र में अच्छे नाविक नहीं बना करते। *अगर आप किसी बस के पीछे भागते हो तब वह उसके अन्दर बैठने की तुलना
SACHIN JAIN द्वारा 02:29 am (IST) पर
चिट्ठा : my writings
मैं हिन्दू हूँ, हिन्दू हूँ मैं, मन की मैं करता ही जाऊं, कभी मैं कृष्ण को अपना कहूं, कभी राम का हो जाऊं, कभी महावीर मुझे अपने लगे, कभी बुद्ध की शरण में जाऊं, देवी से मिन्नतें करू, साईं की भी कृपा मैं मांगू, पैगम्बर पर भी मथ्था टेकू, इशु
Gauri Shevatekar द्वारा 02:22 am (IST) पर
चिट्ठा : Guruseva
..................." प्रेम , सहानुभूति, सम्मान, मधुर वचन, सक्रिय हित, त्याग-भावना आदि से हर किसीको सदा के लिए अपना बना सकते हो | तुम्हारा ऐसा व्यवहार होगा तो लोग तुम्हारे लिए बड़े-से-बड़े त्याग के लिए तैयार हो जायेंगे | तुम्हारी लोकप्रियता मौखिक नही रहेगी | लोगो के हृदय में बड़ा
यशवंत सिंह yashwant singh द्वारा 02:16 am (IST) पर
चिट्ठा : भड़ास
बहुत दिनों बाद भड़ास पर लिखने को मजबूर हुआ हूं। राम, धर्म, हिंदु, मुस्लिम, आतंकवाद, धर्मनिरपेक्षता, विहिप, भाजपा, संघ.... को लेकर लगातार लोग अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं और उनके विचार के प्रतिवाद में विचार आ रहे हैं। मैं यहां कौन सही कौन गलत का भाषण देने नहीं आया
SUN RISE द्वारा 02:15 am (IST) पर
चिट्ठा : छपास
टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ की पट्टी कौंधती है..महानायक बीमार...महानायक को अस्पताल में भर्ती कराया गया...मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया...पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्तापल में भर्ती कराया गया...ब्रेकिंग न्यूज़ बता रही थी कोई महानायक बीमार था..आज उस महानायक का 66 वां जन्मदिन भी था...उसके बाद क्या...अस्पताल
vimal verma द्वारा 02:15 am (IST) पर
चिट्ठा : ठुमरी
संगीत अकेलेपन का साथी है...और साथ साथ दोस्तों की महफ़िल में संगीत की बैठकी हो तो पूरा का पूरा हुजूम थिरक रहा होता है या अकेले हों तो भी संगीत आपका अच्छा साथी होता ही है,पर इधर बहुत दिनों से कुछ नया सुना भी नहीं है...और अब लगता है गुलाम
Pawan Nishant द्वारा 02:09 am (IST) पर
सुहाग रात के तोहफे में आप अपनी पत्नी को क्या दे सकते हैं। कुछ भी। हर वो चीज जो पैसे से खरीदी जा सकती है, लेकिन मैंने एक ऐसा तोहफा अपनी पत्नी को दिया, जो पैसे से नहीं खरीदा जा सकता था। अभी रात के एक बजकर 47 मिनट हुए
Satyajeetprakash द्वारा 02:03 am (IST) पर
चिट्ठा : हृदयांजलि
एक मच्छर, साला एक मच्छर, आदमी को हिजड़ा बना देता है. एक खटमल पूरी रात को अपाहिज कर देता है. सुबह घर से निकलो, भीड़ का हिस्सा बनो. शाम को घर जाओ, दारू पिओ, बच्चे पैदा करो और सुबह तलक फिर एकबार मर जाओ. क्योंकि आत्मा और अंदर का इंसान
लोकेश द्वारा 01:59 am (IST) पर
चिट्ठा : अदालत
फिजी की सर्वोच्च अदालत ने देश में अंतरिम सरकार की नियुक्ति के राष्ट्रपति के कदम को जायज ठहराया है। इस फैसले से 2006 में हुए सैन्य विद्रोह के बाद से चल रही देश की सैन्य सरकार को वैधता मिल गई है। दक्षिण प्रशांत महासागर के द्वीप समूह वाले इस देश
Yusuf Kirmani द्वारा 01:50 am (IST) पर
चिट्ठा : हम सब की बात
एक कम्युनिस्ट देश (communist countries) के रूप में जब रूस टूट रहा था तो उस वक्त अति उत्साही लोगों ने लहगभग घोषणा कर दी थी कि पूंजीवादी देश (capitalist countries) ही लोगों को तरक्की के रास्ते पर ले जा सकते हैं। अमेरिका को इस पूंजीवादी व्यवस्था (capitalism) का सबसे
द्वारा 01:47 am (IST) पर
.......    'सूँ साँ माणस गंध'       सुनो दुश्मन!    मैं न तो किसी फौज का जनरल हूँ, न किसी देश का प्रधानमंत्री , मैं दूरदर्शन का निदेशक भी नहीं हूँ और खुफिया विभाग की नौकरी भी कब का छोड़ चुका हूँ, मैं कोई वाइस चांसलर भी नहीं
अरूणा राय द्वारा 01:36 am (IST) पर
चिट्ठा : रोज - रोज...Rose
दुखी हैं देवता कि मनुपुत्र लगातार आदमी होते जा रहे हैं कोई मौक़ा ही नहीं दे रहे अवतार का युग बीता जब कामी और उदंड ब्रह्म-हत्यारों की सोमरस से अर्चना करते-करते थक जाता था वह... यहाँ तक कि आसन मार-आँखें मूंद बैठे-बैठे मुनी हो जाता था अब तो तैंतीस के
प्रतीक माहेश्वरी द्वारा 01:36 am (IST) पर
Album/Movie : छलिया (1960) Music By : कल्यानजी आनंदजी Lyrics By : कमर जलालाबादी Performed By : मुकेश डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा बिन पिए मैं तो गिरा...मैं तो गिरा हाय अल्लाह, सूरत आपकी सुभान अल्लाह तेरी अदा वाह-वाह क्या बात है अँखियाँ झुकी झुकी, बातें रुकी रुकी
मानव द्वारा 01:30 am (IST) पर
चिट्ठा : मौन में बात..
कला को बाज़ार ही चलाता है, शायद यह ही कला की त्रासदी है.... कला को सामान्य जीवन के बाहर के शौक के रुप में हमेशा रखा गया है। शुद्ध कला की जगह इस बाज़ार में कितनी है? यह मानने को हमेशा जी चाहता है कि मैं वह ही लिखूगाँ या
संजीव तिवारी द्वारा 01:29 am (IST) पर
छत्तीसगढ़ में नक्सली, जनजातीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। ये लोगों पर ज्यादतियां करने के साथ उन्हें अपने से जुड़ने के लिए भी विवश कर रहे हैं। यह खुलासा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में
निशांत मिश्र द्वारा 01:29 am (IST) पर
चिट्ठा : चित्रगीत
फ़िल्म - छोटी बहन, गायक - सुबीर सेन और लता मंगेशकर, संगीत - शंकर-जयकिशन, गीत - शैलेन्द्र सु: मैं रंगीला प्यार का राही दूर मेरी मंज़िल शोख नज़र का तीर तू ने मारा दिल हुआ घायल ल: तेरे लिए ही सम्भाल के रखा था प्यार भरा ये दिल तेरे इशारों

 

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