सज्जन

From सर्वज्ञ

साधु ऐसा चाहिये , जैसा सूप सुभाय । सार सार को गहि रहै , थोथा देय उडाय ॥ — कबीर

शठे शाठ्यं समाचरेत् । ( दुष्ट के साथ दुष्टता बरतनी चाहिये ) — चाणक्य

बुरे आदमी के साथ भी भलाई करनी चाहिए – कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा डालकर उसका मुंह बन्द करना ही अच्छा है | – शेख सादी

महान पुरुष की पहली पहचान उसकी विनम्रता है.

भरे बादल और फले वृक्ष नीचे झुकरे है , सज्जन ज्ञान और धन पाकर विनम्र बनते हैं.

चापलूसी का ज़हरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझकर पी न जाएं। - प्रेमचन्द

जो दुष्ट का सत्कार करता है वह मानो आकाश में बीज बोता है, हवा में सुंदर चित्र बनाता है और पानी में रेखा खींचता है। - प्रास्ताविकविलास

जिस प्रकार राख से सना हाथ जैसे-जैसे दर्पण पर घिसा जाता है, वैसे-वैसे उसके प्रतिबिंब को साफ करता है, उसी प्रकार दुष्ट जैसे-जैसे सज्जन का अनादर करता है, वैसे-वैसे वह उसकी कांति को बढ़ाता है। - वासवदत्ता

झूठा मीठे बचन कहि रिन उधार लै जाय लेत परम सुख ऊपजै लै के दियो न जाय लै के दियो न जाय ऊंच अरू नीच बतावै रिन उधार की रीति माँगते मारन धावै कह गिरधर कविराय रहै वो मन में रूठा बहुत दिना होइ जायँ कहै तेरो कागद झूठा —–गिरधर

भले भलाइहिं सों लहहिं, लहहिं निचाइहिं नीच। सुधा सराहिय अमरता, गरल सराहिय मीच।। ——गोस्वामी तुलसीदास

रहिमन वहाँ न जाइये , जहाँ कपट को हेत । हम तो ढारत ढेकुली , सींचत आपनो खेत ॥ ( ढेंकुली = कुँए से पानी निकालने का बर्तन )

रहिमन ओछे नरन सों , बैर भली ना प्रीति । काटे चाटे श्वान के , दोऊ भाँति बिपरीत ॥

सांप के दांत में विष रहता है, मक्खी के सिर में और बिच्छू की पूंछ में किन्तु दुर्जन के पूरे शरीर में विष रहता है । –कबीर

कुटिल लोगों के प्रति सरल व्यवहार अच्छी नीति नहीं । — श्री हर्ष

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