Anugunj
From सर्वज्ञ
[edit] क्या है अनुगूँज?संचार के विविध माध्यमों से हमें हर रोज़ ढेरों सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। इन सूचनाओं और हमारे आसपास की घटनाओं से हमारी राय बनती है। ज़ाहिर है मुख़्तलिफ़ राय; हर राय के पीछे अपने वजहें। राय जो आपकी मौज़ूदा मनःस्थिति, स्थान और आपके अपने खास व्यक्तित्व और सोच के प्रभाव से बनाती है आपकी विशिष्ट पहचान। राय जो कई दफा तो दिखाती है समाज को आईना और कई बार पेश करती है मुद्दे का कोई अनसोचा पहलू।जनतंत्र में विचारों के व्यक्त करने की आज़ादी होनी चाहिए, कम से कम जाल पर ऐसी स्थिति तो है। अक्सर जो हम सोचते हैं उस पर मतैक्य या मतान्तर होता ही रहता है। अनुगूँज ऐसा ही प्रयास है, जहाँ हर पखवाड़े पेश होगी किसी एक ही मुद्दे पर विभिन्न चिट्ठाकारों के मतों की “अनुगूँज”। अनुगूँज की मेज़बानी हर बार अलग अलग चिट्ठाकार करेंगे, विषय का निर्धारण भी वही करेंगे। आयोजन की तारीख होगी हर माह की १ से ६ और १५ से २० तारीख के मध्य, वास्तविक तारीख नीचे दी गई तालिका के अनुसार होगी। जो चिट्ठाकार किसी “अनुगूँज” में भाग लेना चाहते हों तो उन्हें बस इतना करना है:
<a href='http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Anugunj'><img src='http://akshargram.com/images/anugunj.jpg' border='0' alt='Akshargram Anugunj' align='right' hspace='5' vspace='5' /></a>
टैगः <a href="http://technorati.com/tag/anugunj" rel="tag">anugunj</a>, <a href="http://technorati.com/tag/अनुगूँज" rel="tag">अनुगूँज</a>
<p><font size="2">चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: <a title="अनुगूँज सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%97%E0%A5%82%E0%A4%81%E0%A4%9C">अनुगूँज</a>, <a title="anugunj सम्बन्धित चिट्ठे" href="http://www.chitthajagat.in/?shabd=anugunj">anugunj</a>, </font> </p>
[edit] अनुगूँज विगत आयोजन
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[edit] हालिया अनुगूँज2008-05-01 15:14:04 UTC
मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास में ही था। धीरे-धीरे इसकी ऐसी आदत हो गयी कि जब हमने मकान बदले तो भी मैं सुबह वाचनालय अखबार पढ़ने जरूर जाता और धीरे-धीरे शहर बढ़ने के साथ थोड़ी दूर एक कालोनी में आया और वहां कोई वाचनालय नहीं होने के कारण अखबार मंगवाना शुरू किया। इधर इलैक्ट्रोनिक मीडिया के तेजी से बढ़ने के साथ ही डिस्क कनेक्शन भी लग गया और एक लायब्रेरी भी पास में खुल गयी जहां मैं अपने घर आने वाले अखबार के अलावा अन्य अखबार वहां
2007-12-06 19:55:13 UTC
कोई हमारे दर्द को आकर सहलाये इस चाह में इन्तजार करने का ज़माना अब नहीं रहा किसी के दर्द को सहलाकर हम अपने दिल को तसल्ली कर लें पर किसी के दिल का हिस्सा बन जाएं ऐसा नाम कमाना नहीं रहा जिन्दगी के इस सफर में हमसफ़र कई बनाते हैं पर बस जाएं किसी के साथ जिन्दगी भर के लिए ऐसा आशियाना अब नहीं रहा वादे करें खूब नकली बाग़ में दिखाए नकली दूब छोड़ जाएं बेरहम जब मझधार में रहें डूब किसी की जिन्दगी में अमृत घोलकर अपने लिए भी सुख ढूंढ लें ऐसा कोई सयाना नहीं रहा —————————-
2007-11-28 18:16:31 UTC
मामला एक कंपनी का Posted on November 28, 2007 by दीपक भारतदीप हीरो ने कहा निर्देशक और निर्माता से ‘आज शूटिंग नहीं करूंगा पैकअप करा दो मेरा मूड है खराब’ निर्माता ने अपना मोबाइल उसकी तरफ बढ़ाया और कहा ‘मैंने नंबर लगा दिया है पहले इस पर बात कर लो फिर देना जनाब’ हीरो ने नंबर देखा और घबडाया अपने सेक्रेटरी को बुलाया उसने जब मामला समझा तब उसने भी अपना मोबाइल निर्माता की तरफ बढाया और कहा ‘उस बिचारे को क्या धमकाते हो मुझ से बात करो आप इस नंबर पर बात करो पहले जनाब ‘ निर्माता का सेक्र
2007-11-24 07:25:17 UTC
यहाँ बदलते हैं रिश्ते Posted on November 19, 2007 by दीपक भारतदीप जब काम था वह रोज हमारे गरीबखाने पर आये अब उन्हें हमें याद करने की फुरसत भी नहीं मिलती गुजरे पलों की उन्हें कौन याद दिलाये हम डरते हैं कि कहीं याद दिलाने पर उन्हें अपने कमजोर पल न सताने लगें वह यह सोचकर मिलने से बहुत घबडाते हैं कि हम उन्हें अपनी पुरानी असलियत का कहीं आइना न दिखाने लगें दूरियां है कि बढती जाएँ टूटे-बिखरे रिश्तों को फिर जोड़ना इतना आसान नहीं जितना लगता है बात पहले यहीं अटकती हैं कि आगे पहले कब और
2007-11-13 07:26:46 UTC
पंकज ने घोषणा तो कर दी थी, और १५ सितंबर (२००७) की तारीख भी तय कर दी थी, लेकिन आगे कुछ हुआ ही नहीं। शायद लोग रावण जलाने, पटाखे खरीदने और कुत्ती चीज़ (यानी कंसल्टिंग) करने में लगे हुए थे। अब क्योंकि मैं इस पर लिखना चाहता हूँ, पंकज की अनुमति के साथ (जो कि माँगी नहीं गई है) इसकी तारीख ३० नवम्बर २००७ तक बढ़ा रहा हूँ। तो आप लिखें न लिंखें मेरा लिखा पढ़ ज़रूर लेना टैगः anugunj, अनुगूँज चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: अनुगूँज, anugunj,
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[edit] अनुगूँज आगामी आयोजन
अनुगूँज की मेज़बानी के इच्छुक तालिका में अपना नाम व तिथि डाल दें।
| पखवाड़ा | आयोजक |
| 01-09-2006 | संजय बेंगाणी |
| आगामी उपलब्ध तिथि | जीतू |

