Blog
From सर्वज्ञ
ब्लॉग तकनीकी रुप से एक तरह की वेबसाइट होती है। इसको बनाना तथा संचालन करना अत्यंत आसान होता है। इसके लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की जरुरत नहीं। यदि आप अपने कंप्यूटर पर यह पृष्ठ देख रहे हैं तो समझिए कि आप ब्लॉग बनाने तथा चलाने हेतु पूर्णतया सक्षम हैं।
ब्लॉग में आप एक तरह से लेख लिखते हैं जिन्हें पोस्ट या प्रविष्टि कहा जाता है। इस में आप समय समय पर लेख लिखते हैं, वह सब लेख इस तरह इकट्ठे होते जाते हैं कि नवीनतम लेख सब से ऊपर होता है। उसके बाद एक सप्ताह या एक महीने की समयावधि पर आर्काइव (संग्रह) में डाले जाते रहते हैं जो कि तिथि तथा वर्ष आदि के हिसाब से व्यवस्थित होते हैं। इसके अतिरिक्त आप अपने लेखों को विषयानुसार विभिन्न श्रेणियों में डाल सकते हैं।
अब पाठक जब आपके ब्लॉग पर आएगा तो मुख्य पृष्ठ पर उसे आपकी नवीनतम पोस्ट दिखेगी। वह उसे पढ़ने के बाद उस पर टिप्पणी कर सकता है, पाठकों की सभी टिप्पणियाँ पोस्ट के नीचे इकट्ठी होती जाती हैं, लेखक उन पर प्रतिटिप्पणी कर सकता है। ब्लॉग का एक मुख्य लाभ ये भी है कि आप अपने लेख बारे प्रतिक्रिया जान सकते हैं।
ब्लॉग का हिन्दी में प्रचलित नाम चिट्ठा है इसी प्रकार ब्लॉगिंग को चिट्ठाकारी कहा जाता है तथा ब्लॉग लिखने वाले को ब्लॉगर या चिट्ठाकार।
Contents |
[edit] ब्लॉग की परिभाषा क्या है
इस विषय पर विद्वानों की अलग अलग राय है। कोई कहता है कि ये दिल की भड़ास है, कोई कहता है कि पत्रकारिता की तरफ बढाया गया पहला कदम है (अब तो भारत सरकार भी ब्लॉगरों को पत्रकार मानती है), कोई मानता है कि दिल के गुबार निकालने का साधन है, कोई कहता है दिनचर्या की डायरी है तो कोई अपने विचारों को व्यक्त करने का मंच मानता है, कोई इसमें अपने पेशे के बारे में लिखता है तो कोई अपनी हॉबी के बारे में। आज जब जाल ने दुनिया को एक वैश्विक गाँव में तब्दील कर दिया है, ब्लॉग के ज़रिये आपके विचारों को व्यक्त करने का एक नया और प्रभावशाली माध्यम मिल गया है। इस राह में आपको अपनी तरह के, या अपने से जुदा, दूसरे कई राही मिलते रहते हैं जिनकी संगत, और कई दफा मित्रता, से आपकी शैली और सोच विचार में दिनों दिन परिवर्तन आता है, आपकी लिखने की कला का भी विकास होता है। ब्लॉग बेशक नियमित लेखन और इसके ज़रिये पाठकों से सीधे संवाद का एक बेजोड़ माध्यम है।
[edit] ब्लॉग के नए रूप
लेखन ही क्यों ब्लॉग के विभिन्न रूपों के ज़रिये विचारों का संप्रेषण संभव है। ब्लॉगिंग विधा विभिन्न तकनलॉजियों का भी मेल है, जैसे फोटोब्लॉग, ऑडियो ब्लॉग, मोब्लॉग और वीडियो ब्लॉग। ब्लॉग के द्वारा आप अपनी रचनाधर्मिता को नए आयाम दे सकते हैं। ब्लॉग में क्या लिखें यह तो पूर्णतः आप पर निर्भर करता है। कुछ लोग राजनीति और सामयिक घटनाक्रम पर अपनी राय ज़ाहिर करते हैं, तो कुछ गूढ़ तकनीकी विषयों पर परिचर्चा करते हैं। कई तरह के ब्लॉग दुनिया के तमाम विषयों में प्रारंभ हो चुके हैं। हिन्दी रचनाकारों के लिए तो यह सर्वोत्तम माध्यम बन सकता है। अपनी कविता, कहानी, उपन्यास, व्यंग्य और ललित निबंध सब आप इस पर निरंतर लिख सकते हैं और लगातार प्रकाशित कर सकते हैं, यानी आपकी अपनी पत्रिका।
ब्लॉग की सबसे बड़ी खासियत संभवतः यह है यह चिरकाल तक लोगों के लिए पढ़ने के लिए उपलब्ध रहेगा। यह नहीं कि पेपर बैक संस्करण की तरह प्रकाशित हुआ और समय के साथ नष्ट हो गया। जब तक इंटरनेट सांस लेता रहेगा और आपका जालस्थल जीवित है, आपकी रचना आम लोगों की पहुँच में सदा सर्वदा रहेगी।
संप्रति हिन्दी ब्लॉगमंडल में विभिन्न ब्लॉग रूपों के उदाहरण भी मौजूद हैं। जैसे कि अक्षरग्राम, बुनो कहानी, ज्ञान विज्ञान जैसे ब्लॉग समूह ब्लॉग हैं, यानि कि लेखकों के समूह द्वारा लिखे जाने वाले चिट्ठे। ब्लॉगनाद विश्व का पहला ऑडियो ब्लॉग है।
[edit] ब्लॉग कैसे प्रचलन में आया
ब्लॉग अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। 'ब्लॉग' वेबलाग का संक्षिप्त रूप है, जो 1997 के दौरान अमेरिका में प्रचलन में आया। इसमें शुरू मे लोगों ने अपने जर्नल्स प्रकाशित किये, उन पर टिप्पणियां आयीं। इन्हें ही ब्लॉग कहा जाने लगा। ब्लॉग लिखने वाले ब्लागर और अभिव्यक्ति की यह विधा ब्लॉगिंग कहलायी।
कृपया इस सेक्शन को बढ़ाएं, ध्यान दें इस सेक्शन में इंग्लिश ब्लॉगिंग के शुरुआत के बारे में लिखना है।
[edit] हिन्दी ब्लॉगिंग का विकास
हिन्दी का पहला ब्लॉग श्री आलोक कुमार का 9-2-11 नाम से था। ब्लॉग को चिट्ठा नाम भी उन्होंने ही दिया था। उनके कुछ समय बाद देबाशीष, पंकज नरुला, रविरतलामी, अतुल अरोरा, अनूप शुक्ला, ई-स्वामी तथा जीतेंद्र चौधरी आदि सज्जनों ने हिन्दी ब्लॉग आरंभ किए। उस समय यूनिकोड हिन्दी में लिखना काफी कठिन कार्य था, न तो इसके लिए पर्याप्त टूल उपलब्ध थे और न ही इंटरनेट की विभिन्न सेवाएं यूनिकोड को सपोर्ट करती थीं। परंतु धीरे धीरे यूनिकोड के विकास के साथ हिन्दी लिखने के नए नए आसान टूल्स के आगमन तथा इंटरनेट सेवाओं के यूनिकोडित होने से हिन्दी ब्लॉगरों की संख्या बढ़ने लगी। इस दौरान अक्षरग्राम परिवार ने हिन्दी ब्लॉगिंग के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी यह क्रम जारी है। आज लगभग हिन्दी के ५०० चिट्ठाकार हैं तथा यह संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास आप यहाँ पढ़ सकते हैं।
[edit] हिन्दी में ब्लॉगिंग क्यों की जाए
अपनी भाषा में लिखने का मजा ही कुछ और है। नेट पर लगभग ५०० हिन्दी ब्लॉगरों का ग्रुप है। हिन्दी ब्लॉगजगत एक परिवार की तरह है, यहाँ शीघ्र ही कई मित्र बन जाते हैं। यहाँ आपकी सभी हिन्दी लिखने वालों से मुलाकात होगी। हिन्दी चिट्ठाजगत की कुछ सामुदायिक साइटें हैं जिनके द्वारा सब चिट्ठाकार आपसी संपर्क में रहते हैं। आप भी इनमें शामिल हों। इससे चिट्ठाजगत का परिवार बढ़ने के अतिरिक्त आपको भी नियमित पाठक मिलेंगे।
[edit] संबंधित कड़ियाँ
[edit] हिन्दी ब्लॉगिंग पर पत्र-पत्रिकाओं में लेख
- अभिव्यक्ति का नया माध्यम : ब्लॉग
- चलो चिठ्ठा लिखें
- Hitchhiking through a non-English language blog galaxy
- हिन्दी ब्लॉग अभिव्यक्ति का नया आयाम: लेख, संबंधित पोस्ट
- ब्लॉगर्स के भरोसे नेट पर हिंदी: ऑनलाइन संस्करण, मुद्रित संस्करण
- Language No Bar: ऑनलाइन संस्करण, मुद्रित संस्करण
- आन्दोलन जैसा जोश दिखा रहे हैं हिन्दी ब्लॉगर १७ मार्च २००७ को हिन्दुस्तान दैनिक में प्रकाशित नीलेश मिश्र का लेख
- अंतर्जाल पर देसी चिट्ठे: [1], [2], यूनिकोड में, आईना पर
- हम ब्लॉगिए हैं हमारे चिट्ठे पर पधारो सा
- Blogging straight from the heartland (टाइम्स ऑफ इण्डिया में लेख) ऑनलाइन संस्करण, ईपेपर संस्करण, संबंधित पोस्ट
- प्रिंट मीडिया में चिट्ठाकारी की चर्चा - मुद्रित संस्करण एवं संबंधित खबर, यूनिकोड में
- वैबदुनिया पर रेडियोवाणी ब्लॉग की चर्चा
- वैबदुनिया पर रविरतलामी जी के ब्लॉग की चर्चा
- नए हिन्दी ब्लॉग में एग्रीगेटर
- Ratlam man promoting Hindi on Internet
- कादम्बिनी के अक्तूबर ०७ में हिन्दी ब्लॉगिंग पर लेख: ब्लॉगिंग: ऑनलाइन विश्व की आजाद अभिव्यक्ति
- बीबीसी हिन्दी.कॉम पर लेख: ब्लॉग बना चिट्ठा, जम गई चिट्ठाकारिता
