Hindi Idioms
From सर्वज्ञ
[edit] हिन्दी लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे
- सांच को आंच नहीं
- सांच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप
- एक सुनार की सौ लोहार की
- उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे
- नाच न आये आंगन टेढ़ा
- न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी
- लकीर का फकीर
- चैन की नीद सोना ।
- आये थे हरि भजन को , ओटन लगे कपास ।
- जब भगवान देता है तो छप्पर फ़ाड के देता है ।
- जो गरजते हैं वो बरसते नहीं ।
- अपने मुँह मिया मिट्ठू बनना ।
- सौ सोनार की, एक लोहार की ।
- अधजल गगरी, छलकत जाय ।
- खरबूजे को देखकर तरबूजा रंग बदलता है ।
- चोर-चोर मौसेरे भाई ।
- एक तो चोरी , दूसरे सीनाजोरी ?
- सैंया भये कोतवाल , अब डर काहे का ।
- नौ नगद न तेरह उधार ।
- सावन के अंधे को हरा ही हरा दीखता है ।
- पूत कुपूत त का धन संचय , पूत सुपूत त का धन संचय ।
- मियाँ की दौड मसजिद तक ।
- अंधा क्या चाहे, दो आँखें ।
- खरबूजे को देखकर तरबूजा रंग बदलता है ।
- जैसी करनी , वैसी भरनी ।
- जैसा राजा वैसी प्रजा ( यथा राजा तथा प्रजा )
- नेकी कर, दरिया मे डाल ।
- दाल में काला होना ।
- जैसे उधौ, वैसे माधव ।
- बहती गंगा में हाथ धोना ।
- उलटी गंगा बहाना ।
- चलती का नाम गाडी ।
- चोरी का धन मोरी में जाता है , सूम का धन सैतान खाता है ।
- एक-एक ग्यारह होते हैं ।
- नौ-दो-ग्यारह होना ।
- तीन-पाँच करना ।
- खरबूजे को देखकर तरबूजा रंग बदलता है ।
- जैसी करनी , वैसी भरनी ।
- जैसा राजा वैसी प्रजा ( यथा राजा तथा प्रजा )
- नेकी कर दरिया मे डाल ।
- दाल में काला होना ।
- घी के दिये जलाना ।
- जले पर नमक छिडकना ।
- हवा से बातें करना ।
- पानी-पानी होना ।
- उल्टे बाँस बरेली को ।
- मियाँ की जूती मिया के ही सिर पर ।
- आम के आम , गुठलियों के दाम ।
- आगे कुआँ , पीछे खाई ।
- रमता जोगी, बहता पानी ।
- ऊँट के मुँह मे जीरा ।
- अब पछिताये क्या भया , जब चिडिया चुग गयी खेत ।
- साँप मरे, ना लाठी टूटे ।
- साँप को दूध पिलाना ।
- आस्तीन का साँप होना ।
- दान की बछिया के दाँत नहीं गिने जाते ।
- कुत्ते की मौत मरना ।
- धोबी का कुता , न घर का न घाट का ।
- चाम की थैली , कुक्कुर रखवार ।
- कुत्ते की पूँछ कभी सीधी नहीं होती ।
- घर की मुर्गी दाल बराबर |
- कूप मण्डूक
- घोडे बेचकर सोना ।
- हाथी के दाँत , खाने के और दिखाने के और ।
- घडियाली आँसू बहाना ।
- भैंस के आगे बीन बजाना ।
- भेंड चाल चलना ।
- तेली का बैल होना ।
- सोने की चिडिया ।
- दूध से जली बिल्ली मट्ठा भी फूँक-फूँक कर पीती है ।
- सौ-सौ चूहे खाय बिल्ली हज को चली ।
- तूती बोलना ।
- जल में रहकर मगर से बैर करना ।
- बिल्ली के श्रापने से छींका नही टूट्ता ।
- तोते की तरह रटना ।
- मुर्गा नहीं रहेगा तो क्या सबेरा नही होगा ?
- बिच्छू का मन्तर पता नहीं और साँप के बिल मे हाँथ डाले ।
- अक्ल के घोडे दौडाना ।
- जंगल में नाचा मोर , किसने देखा ?
- बंदर घुडकी देना ।
- खोदा पहाड, निकली चुहिया ।
- ऊँट के मुह में जीरा ।
- हाथी चला जाता है, कुत्ते भौंकते रहते है ।
- अपना उल्लू सीधा करना ।
- कान पर जूँ रेंगना ।
- कलेजे पर साँप लोटना ।
- अक्ल के अंधे ।
- दाहिना हाँथ होना ।
- मुह की खाना ।
- मुह में पानी आना ।
- मुह फ़ेरना ।
- मुह पर कालिख पोतना ।
- हाथ-पाँव फ़ूलना ।
- पेट फूलना ।
- थूककर चाटना ।
- तलवे चाटना ।
- एडी चोटी का जोर लगाना ।
- लार टपकना ।
- हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फारसी क्या |
- मुख में राम, बगल में छुरी |
- आँख का अंधा, नाम नयनसुख |
- अंधा क्या चाहे, दो आँखें ।
- आँख में धूल झोंकना ।
- आँख की किरकिरी होना ।
- आँख की किरकिरी होना ।
- आँख दिखाना ।
- नाक कटवाना ।
- पीठ दिखाना ।
- पीठ मे छुरा भोंकना ।
- छाती चौडी होना ।
- सिर मुडाते ही ओले पडना ।
- सिर पर पैर रखकर भागना ।
- सर कुचलना ।
- सिर ऊँचा करना ।
- सर हथेली पर लेकर काम करना ।
- हाथ बटाना ।
- उंगलियों पर गिनना ।
- लात मारना ।
- कौडी के मोल बेचना ।
- घास छीलना ।
- जूते घिसना ।
- का वर्षा जब कृषि सुखानी ।
- सूरदास की काली कमरिया, चढै न दूजा रंग ।
- आग लगने पर कुंआ खोदना ।
- आग मे घी डालना ।
- नौ नगद न तेरह उधार ।
- उगते सूरज को सब पूजते हैं ।
- डूबते को तिनके का सहारा ।
