InScript
From सर्वज्ञ
इनस्क्रिप्ट एक टच टाइपिंग प्रणाली है। इसका विकास सीडैक ने किया था। यह विधि भारतीय भाषाओं में टाइपिंग की सर्वाधिक वैज्ञानिक विधि है। इस विधि से कम्प्यूटर पर सर्वाधिक गति से हिन्दी टाइप की जा सकती है। यह हिन्दी टाइपिंग की एकमात्र मानक प्रणाली है जिसका कीबोर्ड आजकल विण्डोज, लिनक्स तथा मैकिन्टोश समेत सभी ऑपरेटिंग सिस्टमों में इनबिल्ट आ रहा है। यह भारतीय भाषाओं के ध्वन्यात्मक (Phonetic) गुण के लॉजिक पर आधारित है। इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि कोई भी टाइपिंग हेतु कम से कम कुजिंयाँ दबानी पड़ें, इसी कारण इससे कंप्यूटर पर तीव्रतम गति से हिन्दी टाइप की जा सकती है।
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[edit] इनस्क्रिप्ट लेआउट
लिनक्स (KDE):
[edit] इनस्क्रिप्ट टाइपिंग औजार
इनस्क्रिप्ट टाइपिंग हेतु ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्रकार के औजार उपलब्ध हैं।
ऑनलाइन औजार
- यूनिनागरी का इनस्क्रिप्ट टूल
- देवनागरी.नैट का इनस्क्रिप्ट औजार
- Hindi Virtual Keyboard
ऑफलाइन औजार
- विंडोज एक्स पी में अंतर्निमित (inbuilt) डिफॉल्ट इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड: Hindi Traditional तथा Devanagari-InScript
- माइक्रोसॉफ्ट भाषाइंडिया का Hindi Indic IME
- कैफे हिन्दी टाइपिंग टूल
- लिनक्स के सभी नए संस्करणों में इनबिल्ट इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड उपलब्ध हैं। मैकिनटोश में भी यह अंतर्निमित होता है।
हिन्दी में कार्य करने के लिए Hindi Traditional तथा संस्कृत में कार्य करने के लिए Devanagari - InScript उपयुक्त हैं। इस बारे भाषाइण्डिया की साइट पर बताया गया है:
The Hindi-Traditional and Marathi keyboards contain all the characters that are traditionally used in Hindi and Marathi and include English punctuation without the need to change to the English keyboard to get at the punctuation. It is the recommended keyboard for most users.
The Devanagari-Inscript keyboard contains an extended Devanagari character set that includes characters for transliterating into Devanagari from other Indian languages as well as some Sanskrit and ancient Vedic characters. This keyboard is recommended for special users.
इसके प्रयोग से हिन्दी टाइप करने संबंधी जानकारी भाषाइण्डिया की साइट पर अंग्रेजी में यहाँ तथा हिन्दी में यहाँ उपलब्ध है।
Indic IME विंडोज के साथ सर्वाधिक कंपैटिबल है, यह हर यूनिकोड समर्थित विंडोज एप्लीकेशन में काम करता है, अन्य कीबोर्ड कुछ जगह काम नहीं करते जैसे याहू मैसेंजर आदि।
[edit] इनस्क्रिप्ट टाइपिंग का संक्षिप्त इतिहास
इनस्क्रिप्ट (InScript) कम्प्यूटर में भारतीय भाषाओं में प्रविष्टि करने हेतु एक की-बोर्ड ले-आउट है, जो भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा मानकीकृत इस्की (ISCII-1991) मानकों (IS 13194:1991) का एक भाग है। ISCII दस्तावेजों के ANNEX-D में इसका वर्णन किया गया है।
InScript = Indian Scripts की संक्षिप्ति है। ASCII (AMERICAN STANDARD CODE FOR INFORMATION INTERCHANGE) के सब-सेट के रूप में ISCII (INDIAN SCRIPT CODE FOR INFORMATION INTERCHANGE) के विकास की शुरूआत 1982 में की गई थी। तथा विभिन्न तकनीकी समितियों की रिपोर्टों की समीक्षा के बाद 1983 में ISCII CODE विकसित हुए। उस काल में द्विभाषी टेलेक्स मशीनों में ISSCII-83 कूटों का प्रयोग होता था, जो IBM-PC के EA-ISCII कूटों के साथ मिलते-जुलते थे।
सर्वप्रथम 640k RAM वाले IBM-PCs में इस्की कूटों के अनुसार आई.आई.टी. कानपुर द्वारा डिजाइन किए गए तथा CDAC द्वारा विकसित हार्डवेयर कार्ड GIST CARD के सहारे भारतीय भाषाओं में कम्प्यूटर में पाठ/डैटा संसाधन होता था, बाद में उन्नत मेमोरी वाले कम्प्यूटरों के प्रचलन के बाद सिर्फ सॉफ्टवेयर प्रोग्राम विकसित हुए। अतिरिक्त हार्डवेयर की जरूरत नहीं रही।
1986 में DOE (DEPARTMET OF ELECTORNICS, GOVT. OF INDIA) द्वारा InScript की-बोर्ड ले-आउट का विकास तथा प्रचलन किया गया, इसलिए इसे DOE की-बोर्ड के नाम से भी जाना जाता है। बाद में 1986 में ISCII कूटों में संशोधन हुआ तथा फिर 1991 में कुछ और संशोधनों के बाद अन्ततः ISCII-1991 कूटों को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा मानकीकृत करके जारी किया गया।
InScript की-बोर्ड ब्राह्मी लिपि आधारित 12 भारतीय भाषाओं (1.हिन्दी, 2.संस्कृत, 3.मराठी, 4.पंजाबी, 5.गुजराती, 6.ओड़िआ, 7.बंगाली, 8.असमिया, 9.तेलगू, 10.कन्नड़, 11.मलयालम, 12. तमिल) के लिए एक ही समरूप कुंजीपटल प्रदान करता है। जिससे इनमें से किसी एक भी भाषा में टाइप करने का अभ्यस्त व्यक्ति अन्य 11 भाषाओं में भी बिना उनकी लिपि को जाने भी उसी समान गति से कम्प्टूटर में टंकण कर सकता है।
इनस्क्रिप्ट की परवर्ती सफलताएँ तथा असफलताएँ
परवर्ती काल में इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड अधिक लोकप्रिय तथा सुविधाजनक नहीं हो पाया, इसके कारण निम्नलिखित रहे:
1. जटिल तकनीकी : इस्की कूट भारतीय भाषाओं के अक्षरात्मक अभिगम (SYLLABLIC APPROACH) पर आधारित थे, जो अब गलत अवधारणा सिद्ध हुई है। इनमें कम्प्यूटरों संसाधान के लिए दोमुँही तकनीक अपनानी पड़ती थी। कम्प्यूटर के आन्तरिक संसाधन तथा पाठ/डेटा के भण्डारण के लिए ही इस्की कूट पृष्ठपट में ही काम करते हैं, जबकि पारम्परिक रूप में भारतीय भाषाओं के पाठ/डैटा को स्क्रीन पर प्रदर्शन तथा कागज पर मुद्रण के लिए ISFOC (INDIAN SCRIPT FONT CODE) का सहारा लेना पड़ता था। इसके लिए एक गुप्तचर जैसे जटिल प्रोग्राम (TSR PROGRAM) को अनवरत हवाई-कसरती-नृत्य (ON-THE-FLY TWISTING) करते रहना पड़ता था। इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड ऐसे जटिल प्रोग्राम के आधार पर ही चलता था, जो ISCII कूटों को ISFOC में और ISFOC को ISCII में तत्काल बदलकर काम चलाता था।
दुर्भाग्यवश सिर्फ ISCII का का मानकीकरण हो पाया, ISFOC का मानकीकरण आज तक नहीं हो पाया, जिसके कारण सैंकड़ों / हजारों प्रकार के हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के फोंट विकसित/प्रचलित हो गए, जिनमें कोई आपसी COMPATIBILITY नहीं रही। एक फोंट में किया गया कार्य दूसरे में खोलकर सम्पादित करना तो दूर, पढ़ा तक नहीं जा सकता। आज कई प्रकार के फोंट-कूट परिवर्तक सॉफ्टवेयरों की उपलब्धि होने के बावजूद 100% भूलरहित आउटपुट मिलना सम्भव नहीं हो पाता। एक ही पाठ की बारम्बार प्रूफ रीडिंग, बारम्बार टंकण आदि के कारण होनेवाली मानव-घण्टों की हानि की बाबत प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय हानि होने का अनुमान लगाया जाता है।
2. महंगी तथा मालिकाना तकनीक : इस्की कूटों के आधार पर कम्प्टूर संसाधन की तकनीक छोटे-प्रोग्रामरों तथा सॉफ्टवेयर निर्माताओं को मुफ्त उपलब्ध नहीं हो सकी सुलभ रूप से नहीं मिल पाई, जिससे हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के सॉफ्टवेयर काफी महंगे तथा आम लोगों को पहुँच से दूर रहे। कुछ सरकारी कार्यालयों, सम्पन्न व्यक्तियों तक सीमित रहे। आम जनता सिर्फ मुफ्त उपलब्ध फोंट्स के सहारे येन केन प्रकारेण कम्प्यूटर पर पाठ प्रविष्टि तथा मुद्रण करके ही काम चलाती रही।
3. टाइपराइटर ले-आउट के प्रतिकूल : आरम्भ में जिस्ट कार्ड तथा सॉफ्टवेयर में सिर्फ मानीककृत इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड लेआउट की ही सुविधा प्रदान की जाती रही। जो मैनुअल टाइपराइटर पर काम करने के अभ्यस्त लाखों कर्मचारियों / लोगों के लिए काफी कठिन था। उन्हें पुराने टाइपराइटर ले-आउट को भूल कर इन्स्क्रिप्ट में टंकण करने का अभ्यास करके पर्याप्त टंकण गति लाने में काफी समय एवं श्रम लगता। और फिर इन्स्क्रिप्ट के अभ्यस्त लोगों के लिए टाइपराइटर पर काम कर पाना लगभग असंभव था। न ही कार्यालयों में हिन्दी टाइपराइटरों को फेंक कर पर्याप्त कम्प्यूटर खरीद कर हरेक को प्रदान करना संभव था। अतः कई वर्षों के संघर्ष के बाद 1996-98 में कम्प्यूटरों में हिन्दी आदि में टंकण के लिए रेमिंगटन आदि टाइपराइटर ले-आउट की सुविधा भी प्रदान की गई।
4. अंग्रेजी से अलग : इन्स्क्रिप्ट की-बोर्ड अंग्रेजी (रोमन) अक्षरों के आधार पर हिन्दी आदि भारतीय भाषाओं में टंकण कर पाने के विपरीत बिल्कुल अलग ले-आउट है। जिससे मुफ्त तथा सुलभता से उपलब्ध I-TRANS जैसे की-बोर्ड ले-आउट से लाखों देशी-विदेशी लोग काम चला लेते हैं। इसमें अंग्रेजी और हिन्दी आदि भारीतय भाषाओं में टाइपिंग अलग-अलग सीखनी पड़ती, जो व्यस्त अधिकारियों और विद्वानों के लिए लगभग असंभव था। अतः यह ज्यादा लोकप्रिय और सुलभ नहीं हो पाया।
5. युनिकोड के बाद : विश्व की समस्त लिपियों के लिए एक मानकीकृत अन्तर्राष्ट्रीय कूट 16-बिट युनिकोड के विकास तथा प्रचलन एवं इण्टरनेट की सुविधा सुलभ होने के बाद सन् 2000 में विण्डोज-2000 में युनिकोड हिन्दी की अन्तःनिर्मित सुविधा उपलब्ध होने के बाद इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड फिर से लोकप्रिय हुआ। क्योंकि युनिकोड मानक में संसाधन के लिए भारतीय भाषाओं के ओपेन टाइप फोंट का प्रयोग करना पड़ता है। युनिकोड के मूल अक्षरों में कम्प्यूटर में आन्तरिक संसाधन और भण्डारण तथा ओपेन टाइप फोंट में पारम्परिक रूप में हिन्दी अक्षरों का प्रदर्शन तथा मुद्रण किया जाता है। किसी ON-THE-FLY TSR जैसे जटिल प्रोग्राम की जरूरत नहीं रही। क्योंकि GLYPH SUBSTITUTION, GLYPH POSSITIONING... आदि तकनीकी ओपेन टाइप फोंट के अन्दर ही अन्तर्निहित रहती हैं। की-बोर्ड ले-आउट की-मैप आदि बना लेना काफी सरल होता है। हालांकि कुछ रेण्डरिंग के लिए आपरेटिंग सीस्टम से रेण्डरिंग इंजन के सहारे की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
[edit] भविष्य
पुराने इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड का भविष्य अधिक उज्ज्वल नहीं लगता। क्योंकि अब उपयोक्ता द्वारा स्वयं डिजाइन किए जा सकनेवाले कई प्रोग्राम (कड़ी बाद में दी जाएगी) उपलब्ध हो गए हैं। अपने अभ्यास के अनुरूप हर उपयोक्ता अपनी निजी IME बना सकता है। जिससे शीघ्रातिशीघ्र कम्प्यूटर में टंकण / पाठ प्रविष्टि की जा सके। साथ ही ISCII कूटों की समस्याओं को सुधारने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा नए शोध किए गए हैं तथा ISCII-1991 मानकों में संशोधन करके ISCII-2007 के विकास तथा मानकीकरण के प्रयास भी जारी है। तदनुरूप संशोधित InScript-2007 का भी विकास तथा मानकीकरण की अपेक्षा है, जिससे भारतीय भाषाओं में और अधिक तीव्र गति से तथा यथासम्भव गलती रहित पाठ/डैटा प्रविष्टि की जा सके।
[edit] इनस्क्रिप्ट संबंधी कुछ उपयोगी लेख
- इनस्क्रिप्ट की–बोर्ड
- छींटे और बौछारें » आइए, इनस्क्रिप्ट सीखें
- इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड ले-आऊट की समस्याएँ
- मैं ने अपनाया इनस्क्रिप्ट
- इनस्क्रिप्ट प्रयोगकर्ताओं से कुछ प्रश्न
इनस्क्रिप्ट प्रयोग करने वाले कुछ हिन्दी चिट्ठाकारों में सर्वश्री रविरतलामी, हरिराम पंसारी, आलोक कुमार, पंकज नरुला, श्रीश शर्मा, सृजनशिल्पी आदि प्रमुख हैं।
[edit] संबंधित कड़ियाँ
- InScript Layout: हिन्दी में, In English
- इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड मूल लेआउट(PDF)
- Hindi traditional keyboard layouts
- Typing Devanagari text
- इनस्क्रिप्ट लेआउट स्क्रीनशॉट: [1], [2], [3]
- InScript Typing on Wikipedia
- Animated Hindi Traditional Keyboard Layout
- Animated Devanagari - InScript Keyboard Layout
- Dave - An Inscript Keymap for XFree86 >=4.3.0 and X.Org
- IndLinux wiki - InScript Bugs
