KrutiDev

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कृतिदेव एक ASCII (नॉन-यूनिकोड) हिन्दी फॉन्ट है। यह रेमिंगटन कीबोर्ड लेआउट पर आधारित है। यह हिन्दी संबंधी विभिन्न अनुप्रयोगों हेतु अत्यंत प्रचलित फॉन्ट है। यद्यपि यूनिकोड टाइपिंग के आगमन के बाद इसका प्रचलन काफी कम हो गया है लेकिन अब भी ग्राफिक्स तथा डीटीपी में यह काफी प्रयोग होता है।

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[edit] कृतिदेव फॉन्ट का इतिहास

कृतिदेव फौन्ट्स फ़ोनेटिक कीबोर्ड वाले वर्डप्रोसेसर हिन्दीपैड का एक हिस्सा हैं. सर्व प्रथम यह फ़ौन्ट्स दुनियां फ़ौन्ट्स नाम से १९९३ में प्रस्तुत किये गये. तब प्रत्येक टायपफ़ेस का अपना नाम था, यथा आगरा, अमन, कृष्णा, लिजा, हेमन्त, कनिका सरोज,रिचा, विमल आदि. बाद में इनका सुधरा हुआ रूप देवलिज नाम से आया. १९९६ में इन्हें तीन सौ से भी अधिक टायपफेसों में कृतिफौन्ट्स नाम से प्रस्तुत किया गया. इसके साथ में फ़ोनेटिक लेआउट (टायप हिन्दी द वे यू स्पीक) के साथ साथ हिन्दीपैड भी प्रस्तुत किया गया. कृतिफ़ौन्ट्स हिन्दी के साथ साथ गुजराती, तमिल, मलयालम, बांग्ला, कन्नड़ आदि भाषाओं में भी आये. इसके देवनागरी फ़ौन्ट्स कृतिदेव नाम से जाने जाते हैं. कृतिदेव से हिन्दी एवं मराठी भाषायें लिखी जा सकती हैं.

कृतिदेव को अगर आप हिन्दीपैड के साथ उपयोग करते हैं तो यह फोनेटिक लेआउट के साथ काम करता है किन्तु यदि आप इसे हिन्दीपैड के बिना काम करते हैं तो सामान्यतया रमिंग्टन कीबोर्ड से टायप कर सकते हैं. इसके रेमिंग्टन कीबोर्ड से टायप करने पर कुछ शब्दों के लिये आपको ALT+Numeric की पैड का इस्तेमाल करना पड़ता है.

एक बैक कर्मचारी ने १९९० में स्वैच्छिक रिटायरमेंन्ट लेकर कम्यूटर में हिन्दी मिशन के तहत इन फ़ौन्ट्स का निर्माण किया था. कृतिदेव फ़ौन्ट्स, फोनेटिक कीबोर्ड लेआउट (Type Hindi the Way You Speak) एवं हिन्दी पैड का कापीराईट श्रीमती रजनी शरण गुप्त के नाम पर रजिस्टर्ड है, कापीराईट संख्या एल-१७१८९/९८

आज के यूनीकोड के युग में भी हजारों हिन्दी की वेबसाईट्स कृतिदेव का उपयोग करती हैं.

[edit] कृतिदेव फॉन्ट के अत्यंत प्रचलित होने के कारण

1. कृतिफोन्ट्स का निर्माण पैसे कमाने के इरादे से नहीं बल्कि एक मिशन के तहत हुआ था. शुरूआत में इनका वितरण पब्लिक डोमेन साफ़्टवेयर के तौर पर किया गया था. इसकी वितरण संस्था का नाम ही पब्लिक साफ़्टवेयर लाइब्रेरी था. बाद में यह नाम मात्र के मूल्य रु.275. (जिसमें एक सीडी एवं टायपफेस की पुस्तिका भी शामिल है) में बेचा गया. हिन्दीपैड के साथ इसकी कीमत रु.355/- थी. उस समय इस तरह के साफ़्टवेयर दस हजार से लेकर पच्चीस हजार तक कीमत में उपलब्ध थे. कृतिफोन्ट्स की कीमत हर किसी कम्यूटर उपभोक्ता की पहुंच में थी.

2. अन्य संस्थाओं ने अपने व्यापारिक हित सुरक्षित रखने के लिये फ़ोन्ट्स में असुविधाजनक कापी प्रोटेक्शन लगा रखे थे, जबकि कृतिफ़ोन्ट्स बिना कापी प्रोटेक्शन के प्रस्तुत किये गये. इस कारण आपस में शेयर भी किये गये.

3. कृतिफोन्ट्स पहले भारतीय ट्रू टायप फ़ोन्ट्स हैं. इससे पहले जो भी फोन्ट्स आते थे वह पोस्ट स्क्रिप्ट फ़ोन्ट्स होते थे. इन्हें प्रयोग करने के लिये एडोब टायप मैनेजर का प्रयोग करना पड़ता था. कृतिदेव फोन्ट्स का कम्प्यूटर पर संस्थापन अत्याधिक सरल था.

4. हिन्दीफोन्ट्स को रेमिंग्टन लेआउट में लाया गया ताकि तत्कालीन टायपिस्ट्स इसे बिना किसी दिक्कत के प्रयोग कर सकें. नये लोगों के लिये हिन्दीपैड का लेआउट भी था. इसे प्रयोग के लिये कुछ सीखना नहीं पढ़ा. इस कारण यह बहुत जल्दी लोकप्रिय हो गया.

5. कृतिदेव में तीन सौ से अधिक टायपफेस प्रस्तुत किये गये. ये किसी भी फोन्ट्स पैक को लोकप्रिय कराने के लिये पर्याप्त थे.

6.

[edit] यूनिकोड की ओर कदम

कृतिदेव फॉन्ट में टाइपिंग के अभ्यस्तों के लिए अच्छी सूचना यह है कि रेमिंगटन पर आधारित होने के कारण वे यूनिकोड टाइपिंग कर सकते हैं। इसके लिए रेमिंगटन वाले ही टूल प्रयोग होंगे जिनके बारे में यहाँ बताया गया है।

[edit] फॉण्ट कन्वर्जन

कृतिदेव फॉन्ट में लिखे टैक्स्ट को यूनिकोड में बदलने हेतु इस ऑनलाइन औजार का प्रयोग करें तथा यूनिकोडित टैक्स्ट को कृतिदेव फॉन्ट में बदलने हेतु इस का

इसके अतिरिक्त रुपांतर तथा परिवर्तन आदि ऑफलाइन औजारों की मदद से भी यह कार्य किया जा सकता है।

[edit] संबंधित कड़ियाँ

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