Nagari-intro
From सर्वज्ञ
[edit] देवनागरी लिपि का संक्षिप्त परिचय
१) देवनागरी वर्तमान में संस्कृत ,पाली , हिन्दी , मराठी , कोंकणी , सिन्धी, काश्मीरी , नेपाली , बोडो , मैथिली आदि भाषाऒं की लिपि है ।
२) उर्दू के अनेक साहित्यकार भी उर्दू लिखने के लिए अब देवनागरी लिपि का प्रयोग कर रहे हैं ।
३) इसका विकास ब्राम्ही लिपि से हुआ है ।
४) यह एक ध्वन्यात्मक ( फोनेटिक या फोनेमिक ) लिपि है जो प्रचलित लिपियों ( रोमन , अरबी , चीनी आदि ) में सबसे अधिक वैज्ञानिक है ।
५) इसमे कुल ५२ अक्षर हैं , जिसमें १४ स्वर और ३८ व्यंजन हैं ।
६) अक्षरों की क्रम व्यवस्था ( विन्यास ) भी बहुत ही वैज्ञानिक है । स्वर-व्यंजन , कोमल-कठोर, अल्पप्राण-महाप्राण , अनुनासिक्य-अन्तस्थ-उष्म इत्यादि वर्गीकरण भी वैज्ञानिक हैं ।
७) एक मत के अनुसार देवनगर ( काशी ) मे प्रचलन के कारण इसका नाम देवनागरी पडा ।
८) इस लिपि में विश्व की समस्त भाषाओं की ध्वनिओं को व्यक्त करने की क्षमता है । यही वह लिपि है जिसमे संसार की किसी भी भाषा को रूपान्तरित किया जा सकता है ।
९) इसकी वैज्ञानिकता आश्चर्यचकित कर देती है ।
१०) भारत तथा एशिया की अनेक लिपियों के संकेत देवनागरी से अलग हैं ( उर्दू को छोडकर) , पर उच्चारण व वर्ण-क्रम आदि देवनागरी के ही समान है । इसलिए इन लिपियों को परस्पर आसानी से लिप्यन्तरित किया जा सकता है ।
११) यह बायें से दायें की तरफ़ लिखी जाती है ।
१२) देवनागरी लेखन की दृष्टि से सरल , सौन्दर्य की दृष्टि से सुन्दर और वाचन की दृष्टि से सुपाठ्य है ।
देवनागरी लिपि के अनन्य गुण १) एक ध्वनि : एक सांकेतिक चिह्न
२) एक सांकेतिक चिह्न : एक ध्वनि
३) स्वर और व्यंजन में तर्कसंगत एवं वैज्ञानिक क्रम-विन्यास
४) वर्णों की पूर्णता एवं सम्पन्नता ( ५२ वर्ण , न बहुत अधिक न बहुत कम )
५) उच्चार और लेखन में एकरुपता
६) उच्चारण स्पष्टता ( कहीं कोइ संदेह नही )
७) लेखन और मुद्रण मे एकरूपता ( रोमन , अरबी और फ़ारसी मे हस्त्लिखित और मुद्रित रूप अलग-अलग हैं )
८) देवनागरी लिपि सर्वाधिक ध्वनि चिन्हों को व्यक्त करती है ।
९) लिपि चिह्नों के नाम और ध्वनि मे कोई अन्तर नहीं ( जैसे रोमन में अक्षर का नाम “बी” है और ध्वनि “ब” है )
१०) मात्राओं का प्रयोग
११) अर्ध अक्षर के रूप की सुगमता
देवनागरी पर महापुरुषों के विचार
१) हिन्दुस्तान की एकता के लिये हिन्दी भाषा जितना काम देगी , उससे बहुत अधिक काम देवनागरी लिपि दे सकती है । — आचार्य विनबा भावे
२) देवनागरी किसी भी लिपि की तुलना में अधिक वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित लिपि है । — सर विलियम जोन्स
३) मनव मस्तिष्क से निकली हुई वर्णमालाओं में नागरी सबसे अधिक पूर्ण वर्णमाला है । - जान क्राइस्ट
४) उर्दू लिखने के लिये देवनागरी अपनाने से उर्दू उत्कर्ष को प्राप्त होगी । — खुशवन्त सिंह
देवनागरी की विशिष्टता : एक उदाहरण
भारतवर्ष के साहित्य में कुछ ऐसे रूप विकसित हुए हैं जो देवनागरी लिपि में ही व्यक्त किये जा सकते हैं । उदाहरणस्वरूप केशवदास का एक नया सवैया लीजिये :
मां सम मोह सजै बन बीन, नवीन बजै सह मोस समा ।
मार लतानि बनावति सारि, रिसाति बनावति ताल रमा ॥
मानव ही हरि मोरद मोद, दमोदर मोहि रहि वनमा ।
माल बनी बल केसवदास, सदा बसकेल बनी बलमा ॥
इस सवैया के किसी भी पंक्ति को किसी ओर से भी पढिये , कोई अंतर नही पडेगा । इस प्रकार के चित्रालंकार रोमन और अन्य लिपियों मे अभिव्यक्त नही किये जा सकते ।
नागरी लिपि परिषद की मुख्पत्रिका “नागरी संगम” से साभार
