Romanagari
From सर्वज्ञ
रोमनागरी हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रचलित एक स्लैंग शब्द है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है "रोमन" तथा "नागरी" जहाँ पर "नागरी" "देवनागरी" का संक्षिप्त रुप है।
रोमनागरी से अर्थ रोमन लिपि में लिखी जाने वाली हिन्दी से है। उदाहरण के लिए:
"Main romanagari mein likh raha hun. Mera vatan bharat hai, kitni achhi baat hai ki aaj hum yahan hain, apne vatan ki dharati par. is mitti ki khushbu kahin bhi chale jao mahsus hoti hai. jism chahe jahan bhi ho man hamesha vatan mein rahta hai."
इस तरह की रोमन हिन्दी इंटरनैट पर अधिकतर उन लोगों द्वारा प्रयोग की जाती है जो हिन्दी टाइपिंग तथा उसके लिए उपयुक्त टूल्स से अनभिज्ञ हैं अथवा इस बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। इसके प्रयोग का दूसरा कारण है कई ऐप्लीकेशनों और इंटरनैट सेवाओं का यूनिकोड सपोर्ट न करना जिस वजह से रोमन हिन्दी में ही लिखना मजबूरी हो जाती है।
अब रोमनागरी में लिखने से कुछ नुक्सान हैं जिनमें पहला तो यह कि पाठक को इसे पढ़ने में बहुत कठिनाई होती है। अक्षरों को जोड़-जोड़ कर मतलब समझना पड़ता है जिसमें बहुत वक्त लगता है। सारा जोर लिखे हुए को समझने में ही लगा रहता है जिससे इससे विषय पर ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता। हाँ चैट में यह चल सकता है क्योंकि तब एक बार में एकाध लाइन लिखी जाती है जिसे पढ़ने में उतना समय नहीं लगता।
दूसरा यह हिन्दी का एक विकृत रुप है, कितनी ही कोशिश की जाए रोमन में हिन्दी को सही तरीके से नहीं लिखा जा सकता। इसके अतिरिक्त इस रुप में लिखने से हिन्दी की सुंदरता नष्ट हो जाती है। सर्च की दृष्टि से भी यह लाभदायक नहीं। क्योंकि रोमनागरी में लिखे गए पन्ने न तो इंग्लिश सर्च में आएंगे न हिन्दी सर्च में।
चिट्ठाजगत में बहुत से लोगों का मत है कि या तो हिन्दी देवनागरी में लिखी जाए अन्यथा रोमन में लिखने से बेहतर है कि इंग्लिश भाषा में ही लिखा जाए क्योंकि वह पढ़ने में भी आसान होती है और सुंदर भी दिखती है।
इसके अतिरिक्त एक अन्य कारण है रोमनागरी में न लिखने का। अब ऐसे फोनेटिक टाइपिंग टूल उपलब्ध हैं जिनसे रोमन वाली ही कुंजियों का प्रयोग करते हुए यूनिकोड हिन्दी में लिखा जा सकता है। अर्थात आपको हिन्दी में लिखने के लिए टाइपिंग सीखने की जरुरत नहीं। बस आप उपयुक्त टूल का प्रयोग कीजिए और रोमन वाली ही वर्तनी का प्रयोग करते हुए लिखिए वह खुद ही हिन्दी में छप जाएगा। इस विषय में अधिक जानकारी फोनेटिक नामक पन्ने पर उपलब्ध है।
